भारत WTO मत्स्य सब्सिडी समझौते में शामिल हुआ
- 21 Jul 2026
20 जुलाई, 2026 को भारत ने ‘विश्व व्यापार संगठन के मत्स्य सब्सिडी समझौते’ [WTO Agreement on Fisheries Subsidies (AFS)] की स्वीकृति का औपचारिक दस्तावेज जमा किया और इस समझौते का पक्षकार बन गया।
मुख्य बिंदु
- भारत इस समझौते को स्वीकार करने वाला विश्व व्यापार संगठन का 123वाँ सदस्यबना।
- इस समझौते को वर्ष2022 में जिनेवा में आयोजित विश्व व्यापार संगठन के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में अपनाया गया था।
- यह पर्यावरणीय स्थिरता के उद्देश्य वाला विश्व व्यापार संगठन का पहला समझौता है।
- इसका उद्देश्यअवैध, गैर-सूचित एवं अनियमित मत्स्य आखेट तथा अत्यधिक दोहन वाले मत्स्य भंडारों के दोहन को बढ़ावा देने वाली सब्सिडी को नियंत्रित करना है।
- यह समझौता केवल समुद्री वन्य मत्स्य आखेट और समुद्र में मत्स्य संबंधी गतिविधियों पर लागू होगा।
- जलीय कृषि और अंतर्देशीय मत्स्य पालन को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
- भारत का समुद्री खाद्य निर्यात मुख्य रूप से जलीय कृषि आधारित झींगा उत्पादन पर निर्भर है, इसलिए इससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने की संभावना नहीं है।
- यह समझौता बड़े औद्योगिक मत्स्य बेड़ों को मिलने वाली हानिकारक सब्सिडी को हतोत्साहित करेगा तथा पारंपरिक और छोटे मछुआरों की आजीविका की रक्षा में सहायक होगा।
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