भारत ने घासभूमियों पर पहली मार्गदर्शिका जारी की

  • 18 Aug 2026

17 अगस्त, 2026 को भारत ने मंगोलिया के उलानबटार में मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCCD) के पक्षकारों के सम्मेलन के 17वें सत्र (COP17) में भारत की घासभूमियों एवं अन्य खुले प्राकृतिक पारितंत्रों (ONEs) पर पहली मार्गदर्शिका जारी की।

मुख्य बिंदु

  • पहली राष्ट्रीय मार्गदर्शिका: यह मार्गदर्शिका भारत की घासभूमियों, सवाना, मरुस्थलों तथा अन्य खुले प्राकृतिक पारितंत्रों का पहला व्यापक अवलोकन प्रस्तुत करती है।
  • पारिस्थितिक महत्त्व: ये पारितंत्र जैव विविधता, मृदा एवं जल प्रक्रियाओं, कार्बन भंडारण तथा जलवायु अनुकूलन क्षमता को बनाए रखने में सहायक हैं।
  • प्रमुख पारितंत्र: भारत के खुले प्राकृतिक पारितंत्रों में हिमालयी एवं तराई घासभूमियाँ, थार एवं बन्नी क्षेत्र, दक्कन के सवाना, चट्टानी पठार, बीहड़ एवं झाड़भूमियाँ शामिल हैं।
  • आजीविका में सहयोग: खुले पारितंत्र पूरे भारत में चरवाहा, पशुधन-आधारित एवं कृषि समुदायों की आजीविका को बनाए रखते हैं।
  • विज्ञान-आधारित संरक्षण: यह मार्गदर्शिका खुले प्राकृतिक पारितंत्रों के संरक्षण, पुनर्स्थापन एवं सतत प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है।