गहरे समुद्र एवं दूरस्थ जल मत्स्य संसाधनों पर रिपोर्ट

  • 21 Aug 2026

20 अगस्त, 2026 को सेंटर फॉर मरीन लिविंग रिसोर्सेज एंड इकोलॉजी (CMLRE) ने भारत के 23.7 लाख वर्ग किलोमीटर के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में गहरे समुद्र एवं दूरस्थ जल मत्स्य संसाधनों का आकलन करने वाली एक राष्ट्रीय रिपोर्ट जारी की। इसका उद्देश्य भारत की ब्लू इकोनॉमी के सतत विकास को समर्थन देना है।

मुख्य बिंदु

  • मेसोपेलैजिक क्षेत्र: यह रिपोर्ट (National Report on Deep-Sea and Distant-Water Fishery Resources of the Indian EEZ) समुद्र की 200 से 1,000 मीटर गहराई के बीच स्थित “ट्वाइलाइट ज़ोन” (मेसोपेलैजिक लेयर) का आकलन करती है।
  • समुद्री संसाधन: इसमें लैंटर्नफिश, गहरे समुद्र के झींगे, सेफेलोपोड एवं अन्य मेसोपेलैजिक प्रजातियाँ शामिल हैं।
  • कार्बन चक्र: मेसोपेलैजिक प्रजातियों का ऊर्ध्वाधर प्रवास समुद्र के जैविक कार्बन पंप में योगदान देता है।
  • तलीय संसाधन: गहरे समुद्र के संसाधनों में झींगे, पर्च, स्कॉम्ब्रॉइड, फ्लैटफिश एवं ईल शामिल हैं।
  • दूरस्थ जल प्रजातियाँ: रिपोर्ट में टूना, बिलफिश, शार्क, समुद्री स्क्विड एवं अंटार्कटिक क्रिल का भी आकलन किया गया है।
  • ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा: यह रिपोर्ट सिर्फ़ वैज्ञानिक जानकारी का संग्रह नहीं है, बल्कि भारत की ‘ब्लू इकोनॉमी’ के सतत विकास के लिए स्पष्ट रूपरेखा भी प्रस्तुत करती है, जिसमें संसाधनों के आकलन और जैव-विविधता के संरक्षण के बीच संतुलन बनाया गया है।