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भारत का प्रथम पोर्ट-आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र
- 29 Sep 2026
26 सितंबर 2026 को गुजरात के दींदयाल पोर्ट, कांडला में भारत के पहले पोर्ट-आधारित ई-मेथनॉल उत्पादन संयंत्र की आधारशिला रखी गई। यह स्वच्छ समुद्री ईंधन और भारत के नेट-जीरो संक्रमण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ई-मेथनॉल संयंत्र क्या है?
यह एक अत्याधुनिक पोर्ट-एकीकृत औद्योगिक संयंत्र है, जो नवीकरणीय बिजली से उत्पन्न हरित हाइड्रोजन से संचित किए गए बायोजेनिक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के साथ संश्लेषित करके सिंथेटिक, कार्बन-न्यूट्रल ई-मेथनॉल (ग्रीन मेथनॉल) का उत्पादन करता है।
ई-मेथनॉल संयंत्र की प्रमुख विशेषताएँ
- संस्थागत ढांचा: यह परियोजना दींदयाल पोर्ट अथॉरिटी और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड के बीच 76:24 के संयुक्त उद्यम के रूप में विकसित की जा रही है।
- क्षमता: 150 टन प्रति दिन (टीपीडी), जिसे दो चरणों में विकसित किया जाएगा।
- इनपुट:नवीकरणीय ऊर्जा, डिसेलिनेटेड जल और कैप्चर किया गया बायोजेनिक CO₂।
भारत के समुद्री डीकार्बोनाइजेशन के लिए महत्व
यह संयंत्र समुद्री डीकार्बोनाइजेशन, हरित हाइड्रोजन अपनाने, स्वच्छ ईंधन निर्यात और 2070 तक भारत के नेट-जीरो लक्ष्य को समर्थन दे सकता है। साथ ही, यह अंतर-राज्यीय औद्योगिक सहयोग को भी मजबूत करेगा।


