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अगली पीढ़ी का जीएसटी और भारत का विकास का अगला चरण
- 06 Oct 2026
नौ वर्षों के जीएसटी कार्यान्वयन के बाद, सरकार अनुपालन बोझ को कम करने तथा उपभोग और आर्थिक विकास का समर्थन करने के उद्देश्य से सुधारों का एक नया चरण शुरू कर रही है।
अगली पीढ़ी के जीएसटी (Next-Generation GST) के संबंध में :
- लगभग नौ वर्षों के कार्यान्वयन के बाद, सरकार ने नेक्स्ट-जेन जीएसटी के माध्यम से दो व्यापक चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया है:
- दर युक्तिकरण (Rate rationalisation), जिसे पहले ही लागू किया जा चुका है।
- अनुपालन में आसानी (Ease of compliance), जो सुधारों का अगला चरण है।
- दर युक्तिकरण सितंबर 2025 से लागू किया गया। वस्तुओं और सेवाओं दोनों के लिए कर की तीन दरें हैं: 5%, 18% और 40%।
- इन सुधारों का व्यापक उद्देश्य जटिलता को कम करना और कई वस्तुओं तथा सेवाओं पर कर के बोझ को घटाना था।
- जीएसटी सुधार का अगला चरण: यह निम्नलिखित क्षेत्रों पर केंद्रित है:
- सरल पंजीकरण: छोटे व्यवसायों को तेज और अधिक पूर्वानुमानित प्रक्रिया के माध्यम से जीएसटी पंजीकरण प्राप्त करने में सक्षम होना चाहिए, विशेष रूप से जहाँ कर चोरी का जोखिम कम हो।
- सरल रिटर्न फाइलिंग: अनावश्यक प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को कम करने और स्वचालन बढ़ाने से व्यवसायों द्वारा अनुपालन पर खर्च किए जाने वाले समय और प्रशासनिक संसाधनों को कम किया जा सकता है।
- तेज रिफंड: निर्यातकों और पर्याप्त इनपुट टैक्स वाले व्यवसायों के लिए समय पर रिफंड महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि देरी से कार्यशील पूंजी फंस सकती है।
- बेहतर इनपुट टैक्स क्रेडिट: पात्र इनपुट टैक्स क्रेडिट का पूर्वानुमानित प्रवाह आपूर्ति श्रृंखला में अंतर्निहित कर बोझ को कम कर सकता है और व्यवसायों की कार्यशील पूंजी की स्थिति में सुधार कर सकता है।
- तेज विवाद समाधान: यह लंबी मुकदमेबाजी को कम कर सकता है और व्यवसायों को उनके कर दायित्वों के संबंध में अधिक निश्चितता प्रदान कर सकता है।


