नवीकरणीय ऊर्जा से 240 अरब डॉलर की बचत संभव

  • 07 Nov 2026

नवंबर 2026 में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने ‘इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट रिपोर्ट 2026’ जारी की। इसके अनुसार भारत वर्ष 2030 तक कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर लगभग 240 अरब डॉलर की संचयी बचत कर सकता है।

मुख्य तथ्य

  • आयात व्यय में बचत: IEA के अनुसार भारत ने वर्ष 2011–2025 के दौरान नवीकरणीय विद्युत उत्पादन से कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर 100 अरब डॉलर से अधिक की अनुमानित बचत की।
  • वर्ष 2030 का अनुमान: नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार जारी रहने पर वर्ष 2030 तक संचयी बचत लगभग 240 अरब डॉलर और वार्षिक बचत लगभग 35 अरब डॉलर हो सकती है।
  • प्रमुख ऊर्जा स्रोत: अनुमानित आयात बचत में सौर फोटोवोल्टिक (Solar PV) ऊर्जा का योगदान लगभग 60% और पवन ऊर्जा का लगभग 30% रहने की संभावना है।
  • अनुमान का आधार: IEA ने अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतें वर्ष 2024–2025 के औसत स्तर के आसपास रहने की धारणा पर संभावित बचत का आकलन किया है।
  • कोयला आयात में कमी: IEA के अनुसार वर्ष 2010 के बाद नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता नहीं बढ़ती, तो 2025 में भारत का कोयला आयात लगभग 11 करोड़ टन अधिक होता।
  • नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता: भारत की स्थापित नवीकरणीय विद्युत क्षमता वर्ष 2026 में 300 GW से अधिक हो गई। वर्ष 2030 तक इसके लगभग 530 GW पहुँचने का अनुमान है।
  • सौर एवं पवन क्षमता: वर्ष 2030 तक भारत की सौर PV क्षमता 350 GW से अधिक और पवन ऊर्जा क्षमता लगभग 90 GW होने का अनुमान है।
  • विद्युत उत्पादन: IEA के अनुसार वर्ष 2030 तक नवीकरणीय स्रोत भारत की लगभग 35% बिजली उत्पन्न कर सकते हैं। इनसे उत्पादन लगभग 950 TWh तक पहुँच सकता है।
  • वैश्विक स्थिति: भारत विश्व का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता नवीकरणीय ऊर्जा बाजार और सौर PV मॉड्यूल का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माता बन गया है।