ध्रुवीय जीव विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग


ध्रुवीय जीव विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग के लिए 14 जुलाई, 2021 को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के बीच एक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

महत्वपूर्ण तथ्य: दोनों संगठन एक ही जगह ध्रुवीय जीव विज्ञान के क्षेत्र में प्रासंगिक प्रश्नों के समाधान के लिए साथ मिलकर काम करेंगे। विशेष रूप से, 'ध्रुवीय जीवाणुओं के जैव प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग' पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के बीच इस सहयोग का केंद्र बिंदु हो सकते हैं।

  • इस MoU को ‘ध्रुवीय विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान के परस्पर सहमति वाले क्षेत्रों’ में सहयोग के उद्देश्य से लागू किया जाएगा।
  • ध्रुवीय क्षेत्रों में शोध को तेज करने के क्रम में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के स्टेशनों (केंद्रों) पर ‘संयुक्त प्रयोगशालाओं’ की स्थापना की जाएगी।
  • इससे शोधकर्ताओं को नमूनों को भारत में मुख्य प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने की जरूरत के बिना अपनी साइट पर प्रयोग करने का मौका मिलेगा और इस विशेष वातावरण में जुड़ी बहुमूल्य जानकारी और नवीन उत्पाद सामने आएंगे।

ध्रुवीय क्षेत्र: इसमें अंटार्कटिक, आर्कटिक, दक्षिणी महासागर और हिमालय शामिल है, जो अभी तक एक अस्पष्टीकृत पारिस्थितिकी तंत्र (unexplored ecosystem) के रूप में जाना जाता है।

  • यह एक अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र है, जो दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में अपनी चरम जलवायु के चलते खासी दिलचस्पी पैदा करता है।