भारत द्वारा किगाली संशोधन अनुसमर्थन का निर्णय


18 अगस्त, 2021 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए ओजोन परत क्षयकारी पदार्थों से संबंधित मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में किए गए किगाली संशोधन के अनुसमर्थन को स्वीकृति दी।

कार्यान्वयन रणनीति और लक्ष्य: HFCs को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए राष्ट्रीय रणनीति को 2023 तक तैयार किया जाएगा।

  • HFCs के उत्पादन और खपत के उचित नियंत्रण की अनुमति देने के लिए वर्तमान कानूनी ढांचे में संशोधन, ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थ (विनियमन और नियंत्रण) नियमों को 2024 के मध्य तक लाया जाएगा।
  • भारत 2032 से 4 चरणों में HFCs में कमी लाएगा तथा इसे 2032 में 10%, 2037 में 20%, 2042 में 30% और 2047 में 80% की संचयी कमी के साथ पूरा करेगा।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल: ओजोन परत क्षयकारी पदार्थों पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, ओजोन परत के संरक्षण के लिए एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संधि है, जिसमें मानव निर्मित रसायनों के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाना है।

किगाली संशोधन: अक्टूबर 2016 में रवांडा के किगाली में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के पक्षकारों ने विशेष रूप से प्रशीतन और एयर कंडीशनिंग क्षेत्र में HFCs के उपयोग में वृद्धि को स्वीकार करते हुए HFCs को नियंत्रित पदार्थों सूची में जोड़ने पर सहमति जताई थी और 2040 के दशक के अंत तक इन पदार्थों में 80-85% तक की क्रमिक कमी के लिए एक समय-सीमा को भी मंजूरी दी थी।

हाइड्रोफ्लोरोकार्बन: HFCs समताप मंडल की ओजोन परत का क्षय नहीं करते हैं, लेकिन इनमें 12 से 14,000 तक उच्च वैश्विक तापन क्षमता होती है, जिसका जलवायु पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।