ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (GPAI) तथा भारत

  • 26 Nov 2022

21 नवंबर 2022 को भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वैश्विक भागीदारी [Global Partnership on Artificial Intelligence (GPAI)] नामक समूह की अध्यक्षता ग्रहण की। भारत वर्ष 2022-23 के लिए इस समूह का अध्यक्ष होगा।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने जापान के टोक्यो में आयोजित समूह की तीसरी शिखर बैठक में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। इस दौरान भारत ने फ्रांस से प्रतीकात्मक रूप से समूह की अध्यक्षता ग्रहण की।
  • GPAI समूह मानव केन्द्रित विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दायित्वपूर्ण उपयोग में सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय पहल है। भारत इस समूह का संस्थापक सदस्य है।


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वैश्विक भागीदारी (GPAI)

  • शुभारंभ: 15 संस्थापक सदस्यों द्वारा 15 जून 2020 को इसकी शुरुआत की गई।
  • उद्देश्य: AI के क्षेत्र में इसके सिद्धांत एवं व्यवहार के बीच दिखाई देने वाली खाई को पाटने के लिए अत्याधुनिक अनुसंधान तथा अनुप्रयुक्त गतिविधियों को बढ़ावा देना।
  • विशेषता: यह एक अंतरराष्ट्रीय बहु-हितधारक पहल है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जिम्मेदारीपूर्ण विकास और मानवाधिकारों, समावेशन, विविधता, नवाचार और आर्थिक विकास में उपयोग का मार्गदर्शन करने पर आधारित है।
    • यह प्रतिभागी देशों के अनुभव और विविधता का उपयोग करके एआई (AI) से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों की बेहतर समझ विकसित करने का अपने किस्म का पहला प्रयास भी है।
    • यह पहल विज्ञान, उद्योग, नागरिक समाज, सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय निकायों तथा शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के संदर्भ में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देती है।
  • सदस्य: GPAI की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार वर्तमान में इसके सदस्यों की संख्या 29 है।
    • सदस्य देश: अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, चेक गणराज्य, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, भारत, आयरलैंड, इज़राइल, इटली, जापान, मैक्सिको, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, पोलैंड, कोरिया गणराज्य, सेनेगल, सर्बिया, सिंगापुर, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ।
  • महत्व: GPAI की भारत को प्राप्त अध्यक्षता यह प्रदर्शित करती है कि वैश्विक स्तर पर भारत विश्वसनीय प्रौद्योगिकी भागीदार के रूप में उभरा है। भारत ने लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने हेतु प्रौद्योगिकी के उपयोग की सदैव वकालत की है।

GPAI के वार्षिक सम्मेलन

  • GPAI मॉन्ट्रियल समिट 2020: GPAI के उद्घाटन संस्करण की बैठक 3- 4 दिसंबर, 2020 के मध्य आयोजित की गई थी। इसकी मेजबानी मॉन्ट्रियल, कनाडा द्वारा की गई थी।
  • GPAI पेरिस समिट 2021: इस समूह की दूसरी वार्षिक बैठक 11-12 नवंबर, 2021 के मध्य फ़्रांस के पेरिस में आयोजित की गई थी।
  • GPAI टोक्यो सम्मेलन 2022: तीसरी वार्षिक बैठक जापान के टोक्यो में 20-21 नवंबर, 2022 के मध्य आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता फ्रांस ने की तथा इसी बैठक में भारत को अध्यक्षता सौंपी गई।

AI पर सरकार की महत्वपूर्ण पहलें

  • राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यनीति: यह कार्यनीति एक रूपरेखा पर आधारित है, जो भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के अनुकूल है। इसका उद्देश्य, एआई विकास का लाभ उठाने के लिए पूरी क्षमता हासिल करना है।
    • यह कार्यनीति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर ऑल से संबन्धित है जिसमें पांच क्षेत्रों को महत्वपूर्ण माना गया है- हेल्थकेयर, कृषि, शिक्षा, स्मार्ट सिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर और शहरी यातायात।
  • राष्ट्रीय एआई पोर्टल: सरकार ने ‘राष्ट्रीय एआई पोर्टल’ (National AI Portal) लॉन्च किया है, जो एक ही स्थान पर सभी हितधारकों के लिए देश में कृत्रिम बौद्धिमत्ता (एआई) आधारित पहलों की रिपोजिटरी है।
  • फ्यूचर स्किल्स प्राइम (FutureSkills Prime): इस पहल का उद्देश्य एआई सहित उभरती और भविष्य की प्रौद्योगिकियों में रि-स्किलिंग/अप-स्किलिंग इकोसिस्टम तैयार करना तथा भारत को एक डिजिटल प्रतिभा वाले देश (Digital Talent Nation) के रूप में उभारना है।
    • यह नैसकॉम (NASSCOM) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है
  • उत्कृष्टता केंद्र: अनुसंधान प्रौद्योगिकी के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने कृत्रिम बौद्धिमत्ता सहित विभिन्न उभरती हुई प्रौद्योगिकियों पर कई ‘उत्कृष्टता केंद्र’ (Centres fo Excellence) बनाए हैं।
  • विश्वेश्वरैया पीएचडी योजना: सरकार ने देश में एआई सहित इलेक्ट्रॉनिकी प्रणाली डिजाइन और विनिर्माण के क्षेत्र में पीएचडी की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से ‘विश्वेश्वरैया पीएचडी योजना’ प्रारंभ की है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत के लिए संभावनाएं

  • सरकारी अनुमानों के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से वर्ष 2025 तक भारत की GDP में 450 से 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर वृद्धि होने की संभावना है। यह वित्त वर्ष 2024-25 तक सरकार द्वारा निर्धारित 5 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी लक्ष्य का 10% है।
  • नीति आयोग (NITI Aayog) के अनुमानों के अनुसार- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को उचित ढंग से अपनाने से वर्ष 2035 तक भारतीय अर्थव्यवस्था के सकल मूल्य वर्धन (Gross Value Added-GVA) में 15 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकी तकनीकी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच तथा उनकी सामर्थ्य में वृद्धि करने में सहायक होगी।
  • यह तकनीक कृषि क्षेत्र में उत्पादन में वृद्धि करने, कृषि अपव्यय को रोकने तथा किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी।
  • इसके माध्यम से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता एवं पहुँच में सुधार किया जा सकता है, बल्कि इससे वृद्धिशील शहरी आबादी हेतु कुशल बुनियादी ढाँचे के निर्माण में भी सहायता मिलेगी।