अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात

  • 06 Dec 2022

28 नवंबर, 2022 को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात के संबंध में नवीनतम आंकड़े जारी किये गए।

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के ऋण-जमा अनुपात संबंधी तिमाही आंकड़े (Quarterly Statistics on Credit-Deposit Ratios of Scheduled Commercial Banks)

  • इन आंकड़ों के अनुसार भारत के उत्तरी एवं पश्चिमी क्षेत्रों के क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में वर्ष 2022 में गिरावट आई है, जबकि उत्तर-पूर्वी, पूर्वी, मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में सुधार हुआ है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • 2022 में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में सुधार देखा गया है, जबकि पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली जैसे केंद्रशासित प्रदेश एवं राज्यों में गिरावट देखी गई है।
  • जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख केंद्रशासित प्रदेशों ने वर्ष 2022 में क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में 52.2 प्रतिशत (2021 में 48.9 प्रतिशत) और 36.9 प्रतिशत (2021 में 35.4 प्रतिशत) के साथ बेहतर सुधार किया है।

क्षेत्रवार क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात

क्षेत्र

2021

2022

उत्तरी

78.2 प्रतिशत

77.7 प्रतिशत

उत्तर-पूर्वी

46.1 प्रतिशत

46.4 प्रतिशत

पूर्वी

43.9 प्रतिशत

44.7 प्रतिशत

मध्य

51.3 प्रतिशत

53.1 प्रतिशत

पश्चिमी

78.1 प्रतिशत

77.5 प्रतिशत

दक्षिणी

86.3 प्रतिशत

87.6 प्रतिशत

क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात

  • तात्पर्य: क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात का तात्पर्य बैंकों की संपत्ति और देनदारियों के अनुपात से है। यह अनुपात दर्शाता है कि एक बैंक ने अपने द्वारा जुटाई गई जमाराशियों में से कितना उधार दिया है।
  • उपयोग: इसका उपयोग बैंक के कुल ऋण को प्राप्त कुल जमा राशि से विभाजित करके बैंक की तरलता को मापने के लिए किया जाता है।
  • महत्व: क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात बैंक के वित्तीय स्वास्थ्य का आकलन करने में मदद करता है।
    • इसका उपयोग बैंकिंग विकास में अंतर-राज्यीय असमानताओं और आर्थिक गतिविधियों में बैंकिंग की भूमिका को मापने के लिए एक व्यापक संकेतक के रूप में किया जाता है।
    • इसका निम्न अनुपात दर्शाता है कि बैंक अपने संसाधनों (अर्थात् जमा) का पूर्ण उपयोग नहीं कर रहे हैं। अर्थात यह खराब ऋण वृद्धि को दर्शाता है।
  • ऋणों की गुणवत्ता: क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात बैंक द्वारा जारी किए गए ऋणों की गुणवत्ता को नहीं मापता है। यह उन ऋणों की संख्या को भी नहीं दर्शाता है जो डिफ़ॉल्ट रूप में हैं या उनके भुगतान में चूक हो सकती है।