पीआईबी न्यूज आर्थिक

स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना


वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा 19 अप्रैल, 2021 को ‘स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना’ (Startup India Seed Fund Scheme- SISFS) की शुरूआत की गई।

उद्देश्य: स्टार्टअप्स की अवधारणा की प्रमाणिकता, प्रोटोटाइप विकास, उत्पाद परीक्षणों, बाजार में प्रवेश और व्यावसायीकरण हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना।

महत्वपूर्ण तथ्य: पूरे भारत में पात्र इनक्यूबेटरों के माध्यम से पात्र स्टार्टअप्स को शुरुआती वित्तपोषण प्रदान करने के लिए 945 करोड़ रुपये की राशि का विभाजन अगले 4 वर्षों में किया जाएगा।

  • योजना में 300 इनक्यूबेटर के माध्यम से अनुमानित रूप से 3,600 स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान करने की संभावना है। योजना के माध्यम से, विशेष रूप से, भारत के द्वि-स्तरीय (Tier 2) और त्रि-स्तरीय (Tier 3) शहरों में एक मजबूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होगा।
  • स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना के निष्पादन और निगरानी के लिए, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग ((DPIIT) द्वारा एक विशेषज्ञ सलाहकार समिति का गठन किया गया है। इस समिति द्वारा चयनित किए गए इनक्यूबेटरों को 5 करोड़ रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा।
  • इनक्यूबेटरों को उनके स्टार्टअप्स की अवधारणा की प्रमाणिकता या प्रोटोटाइप विकास या उत्पाद परीक्षणों के सत्यापन के आधार पर 20 लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा बाजार में प्रवेश, व्यावसायीकरण के लिए स्टार्टअप्स को 50 लाख रुपये तक का निवेश प्रदान किया जाएगा।

पीआईबी न्यूज आर्थिक

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना


31 मार्च, 2021 को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 10,900 करोड़ रुपए के प्रावधान वाली केंद्रीय योजना ‘खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना’ (Production Linked Incentive Scheme for Food Processing Industry) को मंजूरी प्रदान की।

उद्देश्य: खाद्य विनिर्माण से जुड़ी इकाइयों को निर्धारित न्यूनतम बिक्री और प्रसंस्करण क्षमता में बढ़ोतरी के लिए न्यूनतम निर्धारित निवेश के लिए समर्थन करना तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय उत्पादों के लिए एक बेहतर बाजार बनाना और उनकी ब्रांडिंग करना।

महत्वपूर्ण तथ्य: इसके पहले घटक में चार बड़े खाद्य उत्पादों के विनिर्माण को प्रोत्साहन देना शामिल है, जिनमें पकाने के लिए तैयार/ खाने के लिए तैयार (रेडी टू कुक/ रेडी टू ईट) भोजन, प्रसंस्कृत फल एवं सब्जियां, समुद्री उत्पाद और मोजरेला चीज (mozzarella cheese) शामिल है, जबकि दूसरा घटक ब्रांडिंग तथा विदेशों में विपणन से संबंधित है।

  • योजना 2021-22 से 2026-27 तक छ: वर्षों की अवधि के लिए लागू की जाएगी। योजना के अंतर्गत 2026-27 में समाप्त होने वाले छ: वर्षों के लिए प्रोत्साहन का भुगतान किया जाएगा।
  • यह योजना अखिल भारतीय आधार पर परियोजना प्रबंधन एजेंसी (Project Management Agency - PMA) के माध्यम से लागू की जाएगी।
  • योजना की निगरानी, केंद्र में मंत्रिमंडल सचिव की अध्यक्षता वाले सचिवों के अधिकार संपन्न समूह द्वारा की जाएगी।
  • ‘खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना’ देश में विनिर्माण क्षमताओं और निर्यात को बढ़ावा देने के ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत नीति आयोग की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के आधार पर तैयार की गई है।

पीआईबी न्यूज अंतरराष्ट्रीय

समुद्री पर्यावरण में प्लास्टिक कचरे की समस्‍या पर भारत-जर्मनी समझौता


19 अप्रैल, 2021 को भारत और जर्मनी ने ‘समुद्री पर्यावरण में प्रवेश कर रहे प्लास्टिक कचरे की समस्या का सामना कर रहे शहरों’ से संबंधित एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

महत्वपूर्ण तथ्य: आवास और शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार और जर्मन संघीय पर्यावरण मंत्रालय ने नई दिल्ली में वर्चुअल समारोह में तकनीकी सहयोग से संबंधित इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

  • परियोजना के नतीजे पूरी तरह से स्वच्छ भारत मिशन- शहरी के उद्देश्यों के अनुरूप हैं, जिसमें सतत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और 2022 तक प्लास्टिक के एकल उपयोग को रोकने के लिए प्रधानमंत्री के विजन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • इस परियोजना की परिकल्पना भारत और जर्मनी के बीच ‘समुद्री कचरे की रोकथाम’ के क्षेत्र में सहयोग के उद्देश्य से संयुक्त घोषणापत्र की रूपरेखा के तहत 2019 में की गई थी।
  • समुद्री पर्यावरण में प्लास्टिक को रोकने की व्यवस्था बढ़ाने के उद्देश्य से इस परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर (आवास और शहरी कार्य मंत्रालय), चुनिंदा राज्यों (उत्तर प्रदेश, केरल और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) और कानपुर, कोच्चि और पोर्ट ब्लेयर शहरों में साढ़े तीन साल की अवधि के लिए चालू किया जाएगा।
  • अनुमान के अनुसार सभी प्लास्टिक का 15-20% नदियों के बहते पानी के माध्यम से महासागरों में प्रवेश कर रहा है, जिनमें से 90% योगदान दुनिया की 10 सबसे प्रदूषित नदियां करती हैं। इनमें से दो नदियां गंगा और ब्रह्मपुत्र भारत में हैं।

पीआईबी न्यूज विज्ञान-प्रौद्योगिकी

एआईएम-प्राइम


देश को डिजिटल रूप से सशक्त करने के लिए एक बड़े और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकीय अभियान हेतु अटल इन्नोवेशन मिशन (एआईएम), नीति आयोग ने ‘एआईएम-प्राइम’ (नवाचार, बाजार परकता और उद्यमिता पर शोध कार्यक्रम) [AIM-PRIME (Program for Researchers on Innovations, Market-Readiness & Entrepreneurship)] का शुभारंभ किया।

उद्देश्य: 12 महीनों की अवधि के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन से विशिष्ट मुद्दों का समाधान ढूंढना।

महत्वपूर्ण तथ्य: यह पहल संपूर्ण भारत में विज्ञान और गहन प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप्स और उद्यमिता संस्थानों को प्रोत्साहित करने और उन्हें मदद करने के लिए शुरू की गई है।

  • इस संबंध में, एआईएम ने इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम को लॉन्च करने के लिए बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) के साथ साझेदारी की है, जिसे एक गैर-लाभकारी प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर 'वेंचर सेंटर' (Venture Center) द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा।
  • कार्यक्रम का सबसे पहले लाभ मजबूत विज्ञान-आधारित गहन प्रौद्योगिकी बिजनेस आइडिया के साथ प्रौद्योगिकी विकसित करने वालों (शुरुआती-चरण वाले प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप, और वैज्ञानिकों / इंजीनियरों / चिकित्सकों) को मिलेगा।
  • यह कार्यक्रम एआईएम द्वारा अनुदान प्राप्त अटल इनक्यूबेशन सेंटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और वरिष्ठ प्रबंधकों के लिए भी खुला है, जो गहन प्रौद्योगिकी उद्यमियों (deep tech entrepreneurs) को मदद उपलब्ध करा रहे हैं।
  • गहन प्रौद्योगिकी (Deep technology) उच्च स्तर की ज्ञान सामग्री पर आधारित बहुत सघन अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) का परिणाम है।

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यूरोपीय संघ की हिन्द-प्रशांत सहयोग रणनीति


यूरोपीय संघ की परिषद ने 19 अप्रैल, 2021 को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में 'क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा, समृद्धि और सतत विकास' में योगदान करने के उद्देश्य से इस क्षेत्र में सामरिक फोकस, उपस्थिति और कार्रवाई को सुदृढ़ करने के लिए हिंद-प्रशांत में सहयोग के लिए एक यूरोपीय संघ की रणनीति को अंगीकार किया है।

महत्वपूर्ण तथ्य: परिषद ने सितंबर 2021 तक भारत-प्रशांत में सहयोग पर एक संयुक्त संचार को आगे बढ़ाने के लिए एक उच्च प्रतिनिधि और आयोग को कार्य सौंपा है।

  • हिन्द प्रशांत क्षेत्र को लेकर यूरोपीय संघ की ताजा प्रतिबद्धता का जोर दीर्घकालिक होगा और यह लोकतंत्र, मानवाधिकार, कानून के शासन तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर आधारित होगा।
  • यूरोपीय संघ ने भारत द्वारा जोर दिए गए एक बिंदु आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संघ) के लिए अपने समर्थन को दोहराते हुए प्रभावी नियम-आधारित बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • ‘यूरोपीय संघ की परिषद’ सदस्य देशों की सरकारों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था है। परिषद में यूरोपीय संघ के प्रत्येक देश के मंत्री कानूनों को अपनाने और नीतियों के समन्वय के लिए बैठक करते हैं।

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एसपीओ2 आधारित पूरक ऑक्सीजन वितरण प्रणाली


रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने दुर्गम पहाड़ियों में अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों पर तैनात सैनिकों के लिए एसपीओ2 (SpO2- रक्त ऑक्सीजन संतृप्ति) आधारित पूरक ऑक्सीजन वितरण प्रणाली विकसित की है।

महत्वपूर्ण तथ्य: SpO2, जिसे ऑक्सीजन संतृप्ति के रूप में भी जाना जाता है, ऑक्सीजन नहीं ले जाने वाले हीमोग्लोबिन की मात्रा के सापेक्ष रक्त में ऑक्सीजन ले जाने वाले हीमोग्लोबिन की मात्रा का मापन है। शरीर के ठीक से कार्य करने के लिए रक्त में ऑक्सीजन का एक निश्चित स्तर होना चाहिए।

  • वास्तव में, रक्त में SpO2 के बहुत कम स्तर के परिणामस्वरूप बहुत गंभीर लक्षण हो सकते हैं, इस स्थिति को हाईपोक्सिमिया (hypoxemia) के रूप में जाना जाता है। हाईपोक्सिमिया की स्थिति हाईपोक्सिया (Hypoxia) मे बदल सकती है। हाईपोक्सिया वह स्थिति है, जब शरीर के ऊतकों में पहुँच रही ऑक्सीजन की मात्रा शरीर की आवश्यकता पूरी करने के लिए अपर्याप्त हो।
  • एसपीओ2 आधारित पूरक ऑक्सीजन वितरण प्रणाली को डीआरडीओ की डिफेन्स बायो-इंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रो मेडिकल लैबोरेट्री (डीईबीईएल), बेंगलुरू द्वारा विकसित किया गया है।
  • यह प्रणाली अतिरिक्त मात्रा में ऑक्सीजन आपूर्ति करती है और व्यक्ति को ऐसी बेहोशी- हाईपोक्सिमिया में जाने से बचाती है, जो कई स्थितियों में घातक सिद्ध होती है।
  • यह प्रणाली हाथ की कलाई में पहने जाने वाले वायरलेस इंटरफेस के माध्यम से पल्स ऑक्सीमीटर का उपयोग करके रोगी के SpO2 स्तर का पता लगा देती है।
  • यह स्वचालित प्रणाली वर्तमान समय में फैली हुई वैश्विक महामारी कोविड-19 परिस्थितियों में भी एक वरदान सिद्ध हो सकती है।

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तरुण बजाज नए राजस्व सचिव नियुक्त


अप्रैल 2021 में तरुण बजाज को नया राजस्व सचिव नियुक्त किया गया है। वे इससे पहले आर्थिक कार्य विभाग में सचिव थे।

  • 1988 बैच के हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी बजाज इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में अतिरिक्त सचिव और संयुक्त सचिव के प्रभार भी संभाल चुके हैं।
  • 28 फरवरी, 2021 को पूर्ववर्ती अजय भूषण पांडेय की सेवानिवृत्ति के बाद बजाज को राजस्व सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था।
  • वित्त मंत्रालय के पांच प्रमुख विभाग हैं जिनमें प्रत्येक विभाग का नेतृत्व सचिव द्वारा किया जाता है - आर्थिक कार्य विभाग, राजस्व विभाग, व्यय विभाग, वित्तीय सेवाएं विभाग तथा निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग।

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भारतीय नौसेना एयर स्क्वाड्रन 323


स्वदेश निर्मित ‘भारतीय नौसेना एयर स्क्वाड्रन (आईएनएएस) 323’ (Indian Naval Air Squadron 323) को गोवा में एएलएच एमके III (ALH Mk III) की पहली इकाई के रूप में नौसेना में शामिल किया गया।

  • यह स्क्वाड्रन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित शक्ति इंजन के साथ तीन अत्याधुनिक मल्टीरोल हेलीकाप्टर एएलएच एमके III का संचालन करेगी।
  • एएलएच के एमके III संस्करण में सभी ‘ग्लास कॉकपिट’ (glass cockpit) हैं और इसका उपयोग खोज और बचाव, विशेष अभियानों और तटीय निगरानी के लिए किया जाएगा।
  • 16 एयरक्राफ्ट की खरीद चल रही है और इनको चरणबद्ध तरीके से भारतीय नौसेना को सौंपा जा रहा है।

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विश्व विरासत दिवस


18 अप्रैल

2021 का विषय/अभियान: 'जटिल अतीत: विविध भविष्य' (Complex Pasts: Diverse Futures)।

महत्वपूर्ण तथ्य: 18 अप्रैल, 1982 को स्मारक और स्थलों पर अंतरराष्ट्रीय परिषद (ICOMOS) द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय स्मारक और स्थल दिवस’ (International Day for Monuments and Sites) स्थापित किया गया था तथा यूनेस्को के महासम्मेलन द्वारा अनुमोदित किया गया था। कई देशों में यह दिवस ‘विश्व विरासत दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

  • यह दिवस ऐतिहासिक महत्व के स्थलों को पहचानने, उनके बारे में जागरूकता बढ़ाने, उनके जीर्णोद्धार करने और संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल देने के लिए समर्पित है।

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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण का आदेश


वाराणसी की एक स्थानीय अदालत ने 8 अप्रैल, 2021 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का एक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसमें परिवर्तन या परिवर्धन (alteration or addition) किया गया है या इसमें किसी भी अन्य धार्मिक संरचना के साथ या ऊपर से किसी भी प्रकार की संरचनात्मक अतिच्छादन (structural overlapping) की गई है।

महत्वपूर्ण तथ्य: ज्ञानवापी को लेकर हिंदू पक्ष की ओर से ये दावा किया जाता है कि विवादित ढांचे के नीचे 100 फीट ऊंचा आदि भगवान विशेश्वर का स्वयम्भू ज्योतिर्लिंग स्थापित है।

  • स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर की ओर से याचिकाकर्ता के अनुसार मंदिर का निर्माण लगभग 2,050 साल पहले महाराजा विक्रमादित्य ने करवाया था।
  • काशी विश्वनाथ- ज्ञानवापी मामले में मंदिर के ट्रस्ट की ओर से 1991 में वाराणसी जिला न्यायालय में दायर एक मुकदमे के अनुसार, 1664 में मुगल बादशाह औरंगजेब ने मंदिर को ध्वस्त कर मंदिर के अवशेषों का उपयोग करके मस्जिद का निर्माण किया था।
  • उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने वाराणसी की जिला अदालत के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा कि अदालत ने ‘उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991’ [Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991] की अनदेखी की है।
  • इस अधिनियम के अनुसार मान्यता प्राप्त प्राचीन स्मारकों और अयोध्या विवादित स्थल को छोड़कर देश के सभी धार्मिक स्थल उसी रूप में रहेंगे जैसा कि वे 15 अगस्त, 1947 को थे, अर्थात उनमें कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता।