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प्रियंका मोहिते ने की माउंट अन्नपूर्णा पर फतह


पश्चिमी महाराष्ट्र के सतारा की प्रियंका मोहिते (Priyanka Mohite) ने 16 अप्रैल, 2021 को विश्व की दसवीं सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट अन्नपूर्णा पर फतह हासिल की।

  • वे यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला पर्वतारोही बन गई हैं।
  • माउंट अन्नपूर्णा नेपाल में स्थित हिमालय का एक पुंजक (पर्वत-माला) है, जिसमें 8,000 मीटर से अधिक ऊंची चोटी शामिल है और इसे चढ़ाई करने के लिए सबसे कठिन पहाड़ों में से एक माना जाता है।

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वर्ष 2100 तक भारत में सबसे अधिक कार्यशील आबादी: लांसेट


लैंसेट (Lancet) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, भारत में वर्ष 2100 तक सर्वाधिक कार्यशील आबादी होने का अनुमान है।

महत्वपूर्ण तथ्य: इसके बाद नाइजीरिया, चीन, और अमेरिका में सबसे अधिक कार्यशील आबादी होगी, जिनकी उम्र 20 से 64 साल के बीच होगी।

  • हालांकि, इस रिपोर्ट में वर्ष 2100 तक दुनिया में कामकाजी आबादी में भारी गिरावट आने का अनुमान लगाया गया है।
  • वर्ष 2100 तक भारत और चीन में काम करने वाले लोगों की संख्या में भारी कमी आएगी, इसके बावजूद भारत में 20 साल से 64 साल की उम्र के लोगों की संख्या सबसे अधिक होगी।
  • भारत 2050 तक जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में आगे निकल सकता है और 2100 तक उस स्थान पर बरकरार रह सकता है।
  • दुनियाभर की आबादी वर्ष 2064 में सबसे अधिक 9.73 बिलियन होगी, इसके बाद इसमें गिरावट आनी शुरू हो जाएगी, जो वर्ष 2100 में घटकर 8.79 बिलियन पर आ जाएगी।
  • 2100 में आबादी के हिसाब से भारत, नाइजीरिया, चीन, अमेरिका और पाकिस्तान पांच सबसे बड़े देश होने की संभावना है।

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देश के पहले मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क की आधारशिला


केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) मंत्री नितिन गडकरी ने 20 अक्टूबर, 2020 को असम के जोगीघोपा में देश के पहले मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क की आधारशिला रखी।

  • 693.97 करोड़ रुपये की लागत वाले इस पार्क का विकास भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘भारतमाला परियोजना’ के तहत किया जाएगा।
  • बोंगाईगाँव जिले में 317 एकड़ में फैले पार्क में राष्ट्रीय राजमार्ग 17, ब्रह्मपुत्र पर प्रस्तावित जोगीघोपा जलमार्ग टर्मिनल, नवनिर्मित रूपसी और गुवाहाटी हवाई अड्डों के साथ-साथ मुख्य सड़क मार्ग से सीधी कनेक्टिविटी होगी।
  • मंत्रालय द्वारा देश में 35 मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क (एमएमएलपी) विकसित करने की योजना है।

पीआईबी न्यूज आर्थिक

आयुष्मान सहकार योजना


कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत शीर्ष स्वायत्त विकास वित्त संस्थान राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने सहकारी समितियों द्वारा देश में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए 19 अक्टूबर, 2020 को ‘आयुष्मान सहकार योजना’ का शुभारम्भ किया।

महत्वपूर्ण तथ्य: आने वाले वर्षों में एनसीडीसी संभावित सहकारी समितियों को 10000 करोड़ रूपये तक के आवधिक ऋण मुहैया कराएगा ।

  • देश में सहकारी समितियों द्वारा संचालित 52 के करीब अस्पतालों की संचयी शैय्या क्षमता 5,000 से अधिक है। एनसीडीसी निधि सहकारिताओं द्वारा स्वास्थ्य देखभाल सेवा को मजबूती प्रदान करेगी ।
  • एनसीडीसी की यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के अनुरूप है, जो स्वास्थ्य में निवेश, स्वास्थ्य सेवाओं के संगठन, प्रौद्योगिकियों तक पहुंच, मानव संसाधन विकास, चिकित्सा बहुलवाद को प्रोत्साहित करने, किसानों को सस्ती स्वास्थ्य देखभाल इत्यादि को सम्मिलित करती है।
  • आयुष्मान सहकार योजना सहकारी अस्पतालों को मेडिकल/ आयुष शिक्षा में भी वित्त पोषण करेगी।
  • योजना दिन-प्रतिदिन के संचालन के लिए आवश्यक कार्यशील पूंजी तथा मार्जिन मनी प्रदान करती है । योजना महिला बहुमत वाली सहकारिताओं को 1% आर्थिक सहायता (सबवेन्शन) प्रदान करेगी ।
  • एनसीडीसी का गठन 1963 में संसदीय अधिनियम के द्वारा सहकारिताओं के संवर्धन एवं विकास के उद्देश्य से हुआ था।

खेल समाचार चर्चित खेल व्यक्तित्व

निहाल सरीन बने जूनियर स्पीड ऑनलाइन शतरंज चैम्पियन


  • भारत के युवा खिलाड़ी निहाल सरीन ने 10 अक्टूबर, 2020 को चेन्नई में खेले गए फाइनल में रूस के एलेक्सी सराना को हराकर चेस डॉट कॉम की जूनियर स्पीड ऑनलाइन शतरंज चैम्पियनशिप 2020 अपने नाम की।
  • सरीन ने विश्व जूनियर के छठे नंबर के खिलाड़ी एलेक्सी सराना को फाइनल में 18 - 7 से पराजित किया।
  • उन्हें 8,766 डॉलर की राशि मिली और इसकी बदौलत उन्होंने 2020 स्पीड चेस चैम्पियनशिप फाइनल के लिये क्वालीफाई किया।

सामयिक खबरें राष्ट्रीय सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप

फेम योजना - II


  • 3 जनवरी, 2020 को देश में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) को अपनाने पर जोर देने हेतु सरकार ने फेम इंडिया (FAME India - Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles in India) योजना चरण II के तहत 24 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 2636 चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना को मंजूरी दी।
  • इन 2636 चार्जिंग स्टेशनों में से 1633 चार्जिंग स्टेशन तीव्र चार्जिंग स्टेशन होंगे और 1003 धीमे चार्जिंग स्टेशन होंगे। इसके साथ चयनित शहरों में लगभग 14000 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

फेम योजना – II : एक नजर

  • मार्च, 2019 में राष्ट्रीय विद्युत गतिशीलता मिशन (NEMM) के तहत शुरू फेम-II का उद्देश्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना और एक अप्रैल, 2019 से शुरू होकर 3 वर्षों की अवधि के लिए 10,000 करोड़ रुपये के लागत के साथ वाणिज्यिक बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में वृद्धि करना है।
  • योजना निम्नलिखित कार्यक्षेत्रों के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है:
  • मांग प्रोत्साहन (Demand Incentive)
  • चार्जिंग स्टेशनों के नेटवर्क की स्थापना
  • प्रचार, IEC (सूचना, शिक्षा और संचार) गतिविधियों सहित योजना का प्रशासन।
  • यह चरण मुख्य रूप से सार्वजनिक और साझा परिवहन के विद्युतीकरण सहयोग पर केंद्रित है, और इसका उद्देश्य लगभग 7000 ई-बसों, 500,000 इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (e-3W), 55,000 इलेक्ट्रिक चार-पहिया (e-4W) यात्री कारों और एक मिलियन इलेक्ट्रिक दोपहिया (e-2W) का प्रोत्साहन करना है।
  • कुल बजटीय सहायता में से लगभग 86 प्रतिशत फंड मांग प्रोत्साहन के लिए आवंटित किया गया है, ताकि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग का सृजन हो सके।

उद्देश्य

  • इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की खरीद पर अग्रिम सहायता और ईवी के लिए आवश्यक चार्जिंग अवसंरचना की स्थापना के माध्यम से इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को तेजी से अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।

मुख्य विशेषताएं

  • सार्वजनिक परिवहन का विद्युतीकरण: सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण पर जोर दिया जाएगा, जिसमें 3-पहिया और बस जैसे परिवहन शामिल हैं और इलेक्ट्रिक बसों के लिए परिचालन व्यय मोड पर मांग प्रोत्साहन राज्य/शहर परिवहन निगमों (एसटीयू) के माध्यम से वितरित किए जाएंगे।
  • सार्वजनिक और निजी वाहनों को प्रोत्साहन: तिपहिया और चार पहिया वाहनों के क्षेत्रों में, प्रोत्साहन मुख्य रूप से सार्वजनिक परिवहन या पंजीकृत वाणिज्यिक वाहनों पर लागू होगा। दोपहिया वाहनों में निजी वाहनों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  • लिथियम-आयन बैटरियों का विकास: उन्नत प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करने के लिए, प्रोत्साहन (incentive) का लाभ केवल उन्हीं वाहनों को दिया जाएगा, जो उन्नत बैटरी जैसे लिथियम-आयन बैटरी और अन्य नई प्रौद्योगिकी वाली बैटरी से सुसज्जित हैं।

राष्ट्रीय विद्युत गतिशीलता मिशन योजना (NEMMP)

  • 2013 में शुरू किया गया NEMMP-2020 एक राष्ट्रीय मिशन दस्तावेज है, जो देश में ईवी को तेजी से अपनाने और उनके निर्माण के लिए दूरदर्शिता और रोडमैप प्रदान करता है।
  • यह योजना राष्ट्रीय ईंधन सुरक्षा को बढ़ाने, सस्ते और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रदान करने और वैश्विक विनिर्माण नेतृत्व के लिए भारतीय मोटर वाहन उद्योग को सक्षम बनाने के लिए डिजाइन की गई है।
  • NEMMP के तहत, वर्ष 2020 तक हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की 6-7 मिलियन बिक्री हासिल करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

प्रभाव

  • प्रदूषण नियंत्रण: जीवाश्म ईंधन के अंधाधुंध उपयोग के कारण देश में ईवी को अपनाने से वायु प्रदूषण को दूर करने में मदद मिलेगी।
  • जीवाश्म ईंधन का सतत उपयोग: यह योजना ईंधन सुरक्षा प्रदान करेगी क्योंकि यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने में मदद करती है, जिससे जीवाश्म ईंधन के सतत और कुशल उपयोग का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • समग्र दृष्टिकोण: यह एक अधिक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, क्योंकि यह न केवल महत्वपूर्ण तकनीकी मुद्दों जैसे कि बैटरी की लागत और दक्षता, चार्जिंग अवसंरचना आदि का समाधान करता है, बल्कि संपूर्ण ईवी मूल्य श्रृंखला के स्वदेशीकरण पर भी जोर देता है।

भारत की विद्युत गतिशीलता पहल की चुनौतियां

बढ़ता कच्चा तेल आयात - एक ऊर्जा सुरक्षा चुनौती

  • भारत की तेल आयात निर्भरता 2017-18 में 82.9 प्रतिशत से बढ़कर 2018-19 में 83.7 प्रतिशत हो गई है।
  • देश के तेल की खपत 2015-16 में 184.7 मिलियन टन से बढ़कर अगले वर्ष में 194.6 मिलियन टन और उसके बाद के वर्ष में 206.2 मिलियन टन हो गई। 2018-19 में मांग 2.6 प्रतिशत बढ़कर 211.6 मिलियन टन हो गई।

बढ़ता प्रदूषण स्तर - एक पर्यावरणीय चुनौती

  • भारत ईंधन के दहन से वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के 6% की हिस्सेदारी के साथ तीसरा सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक देश है।
  • डब्ल्यूएचओ वैश्विक वायु प्रदूषण डेटाबेस के अनुसार, विश्व के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में हैं।

बढ़ती जनसंख्या - एक सतत गतिशीलता चुनौती

  • भारत की वर्तमान जनसंख्या 1.2 अरब से बढ़कर 2030 तक 1.5 अरब तक पहुंचने की उम्मीद है। 1.5 अरब लोगों में से, 2018 के जनसंख्या अनुमान के 34% की तुलना में 40% आबादी के शहरी क्षेत्रों में रहने की उम्मीद है।
  • अतिरिक्त 6% जनसंख्या वृद्धि से देश में जूझ रहे शहरी बुनियादी ढाँचे पर और दबाव बढ़ने की संभावना है, जिसमें सतत गतिशीलता समाधानों की मांग में वृद्धि भी शामिल है।

विद्युत गतिशीलता को बढ़ावा देने हेतु सरकार के प्रयास

  • पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कर पहल:
  • ईंधन बैटरी वाहनों पर जीएसटी में कमी: 28% से 18%
  • लिथियम-आयन बैटरी पर जीएसटी में कमी: 28% से 12%
  • हाइब्रिड वाहनों को लक्जरी कारों की ही श्रेणी में रखा गया है और इस पर 28% का कर और 15% का उपकर (cess) लगाया जाएगा।
  • विद्युत मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए 'सेवा' के रूप में बिजली की बिक्री की अनुमति दी है। यह चार्जिंग बुनियादी ढांचे में निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करेगा।
  • सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय ने बैटरी चालित वाहनों के मामले में परमिट में छूट के संबंध में अधिसूचना जारी की।
  • मार्च, 2019 में सरकार ने स्वच्छ, साझा, सतत और समग्र गतिशीलता पहल को बढ़ावा देने के लिए ‘नेशनल मिशन फॉर ट्रांसफॉर्मेटिव मोबिलिटी और बैटरी स्टोरेज ’ शुरू किया।

सामयिक खबरें राष्ट्रीय कार्यक्रम और योजनाएँ

सांसद आदर्श ग्राम योजना


  • ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY) के चरण-4 के तहत केवल 252 सांसदों ने ग्राम पंचायतों को चुना है, जिसमें लोकसभा के 208 सदस्य और राज्यसभा के 44 सदस्य हैं।

सांसद आदर्श ग्राम योजना

  • ‘आदर्श ग्राम कार्यक्रम’ के नाम से चर्चित इस योजना को 11 अक्टूबर, 2014 को लोकनायक जय प्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर नई दिल्ली में लॉन्च किया गया था।
  • मार्च 2019 तक तीन आदर्श ग्राम विकसित करने का लक्ष्य था, जिनमें से एक को 2016 तक हासिल करना था। इसके बाद 2024 तक पांच और ऐसे आदर्श ग्राम (प्रति वर्ष) चुने जाएंगे और विकसित किए जाएंगे।

योजना का लक्ष्य

  • एक आदर्श भारतीय ग्राम के गांधी की परिकल्पना को वास्तविकता में बदलना

मुख्य उद्देश्य

  • उन प्रक्रियाओं को सक्रिय करना जो चिन्हित ग्राम पंचायतों के समग्र विकास की ओर ले जाती हैं
  • जनसंख्या के सभी वर्गों के जीवन स्तर और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना
  • बुनियादी सुविधाओं में सुधार
  • मानव विकास को बढ़ावा
  • बेहतर आजीविका के अवसर
  • असमानताओं में कमी
  • अधिकारों और हकदारी तक पहुंच
  • व्यापक सामाजिक लामबंदी
  • अन्य ग्राम पंचायतों को प्रशिक्षित करने के लिए स्थानीय विकास के स्कूलों के रूप में पहचान किए गए आदर्श ग्रामों का परिपोषण करना

दृष्टिकोण

इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए SAGY को निम्नलिखित दृष्टिकोण द्वारा निर्देशित किया जाएगा:

  • आदर्श ग्राम पंचायतों (GP) को विकसित करने के लिए सांसदों (MP) के नेतृत्व, क्षमता, प्रतिबद्धता और ऊर्जा का लाभ उठाना
  • सहभागी स्थानीय स्तर के विकास के लिए समुदाय के साथ जुड़ना।
  • लोगों की आकांक्षाओं और स्थानीय क्षमता के अनुरूप समग्र विकास को हासिल करने के लिए विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और निजी एवं स्वैच्छिक पहलों को एकीकृत करना।
  • स्वैच्छिक संगठनों, सहकारी समितियों और शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों के साथ साझेदारी करना।
  • परिणामों और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करना।

SAGY के माध्यम से समग्र विकास

व्यक्तिगत

  • व्यक्तिगत मूल्य
  • स्वच्छता
  • सांस्कृतिक विरासत
  • व्यवहार परिवर्तन

मानवीय

  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • पोषण
  • सामाजिक सुरक्षा

आर्थिक

  • आजीविका
  • कौशल
  • वित्तीय समावेशन
  • बुनियादी सेवाएं

सामाजिक

  • संकल्प
  • सामाजिक मूल्य/नैतिकता
  • सामाजिक न्याय
  • सुशासन

अब तक योजना की प्रगति

  • SAGY के चरण-1 में 703 सांसदों ने ग्राम पंचायतों को गोद लिया था, लेकिन बाद के चरणों में धीरे-धीरे गिरावट के साथ चरण-2 में यह संख्या 497 और चरण-3 में 301 हो गई।
  • नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि 17वीं लोकसभा के गठन के छ: माह से अधिक समय के बाद भी निचले सदन के लगभग दो-तिहाई सदस्यों द्वारा चरण-4 के तहत एक ग्राम पंचायत का चयन करना बाकी है।

स्रोत: इंडिया एक्सप्रेस

31.12.2019 तक SAGY विभिन्न चरणों के तहत सांसदों द्वारा चुने गए ग्राम पंचायत

 

 

चरण-1

चरण-2

चरण-3

चरण-4

सांसदों द्वारा गोद लिए गए ग्राम पंचायत

703

497

301

252

लोकसभा सांसदों द्वारा चुने गए ग्राम पंचायत

500

364

239

208

राज्यसभा सांसदों द्वारा चुने गए ग्राम पंचायत

203

133

62

44

SAGY के मुद्दे

कोई समर्पित निधि नहीं

  • सबसे बड़ी खामी यह है कि सरकार द्वारा इस योजना के लिए अलग से कोई निधि नहीं है। सांसदों को 21 चालू योजनाओं जैसे ग्रामीण आवास के लिए इंदिरा आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, इत्यादि के माध्यम से गोद लिए गए गांवों में धन पहुंचाना है। गांव गोद लेने की योजना में कम रुचि के पीछे धन की कमी प्राथमिक कारण है।

गांव का चयन

  • दिशानिर्देशों के अनुसार, एक सांसद अपने गांव या अपने पति/पत्नी के गांव को छोड़कर किसी भी गांव का चयन कर सकता है। इससे एक सांसद के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्र के एक गांव का चयन करना और दूसरे गांव की अनदेखी करना बहुत मुश्किल हो जाता है।
  • हालांकि, शहरी क्षेत्रों में गांवों का चयन भी एक जटिल प्रक्रिया है, क्योंकि सांसदों द्वारा पहचाने गए अधिकांश गांव SAGY दिशानिर्देशों को पूरा नहीं करते हैं।

निगरानी के मुद्दे

  • निर्दिष्ट गांव विकास योजना (Village Development Plan - VDP) और जिलास्तरीय समिति की अनियमित बैठकों द्वारा विभिन्न हस्तक्षेपों से एक प्लेटफार्म की कमी के कारण सांसदों के लिए नियमित आधार पर जमीनी स्तर पर विकास की निगरानी करना मुश्किल हो गया है।

कार्यान्वयन के मुद्दे

  • SAGY उपलब्ध केंद्रीय और राज्य योजनाओं के अभिसरण और प्रभावी उपयोग के बारे में बात करता है, लेकिन अधिकांश सांसदों को प्रत्येक योजना के प्रावधानों और जमीनी स्तर पर इसके कार्यान्वयन के लिए योजना के संरचना और ढांचे के बारे में जानना बेहद मुश्किल होता है।
  • इसके अलावा, ज्यादातर मामलों में गांव विकास योजना को कार्यक्रम के दिशानिर्देशों के अनुसार तैयार नहीं किया गया है।

समन्वय की कमी

  • विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, केंद्र सरकार की योजनाओं, राज्य सरकार और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय की कमी सांसदों को गांवों को गोद लेने के लिए हतोत्साहित करता है।

भागीदारी का अभाव

  • SAGY का मतलब सामुदायिक भागीदारी पर ध्यान केंद्रित करना है। लेकिन समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से हाशिए पर और सभी आयु वर्ग के लोगों की भागीदारी की कमी इस योजना के दायरे को सीमित करती है।

आगे की राह

  • SAGY के माध्यम से सार्थक परिवर्तन के लिए, सांसद की प्रेरणा महत्वपूर्ण है लेकिन पंचायत और ग्रामीणों की सक्रियता भी आवश्यक है। सरकार को योजना को समग्र बनाने और एक आदर्श गांव बनाने के अपने वांछित लक्ष्य को प्राप्त कर SAGY में अंतर्निहित मुद्दों को हल करने की दिशा में काम करना चाहिए।

सामयिक खबरें राष्ट्रीय रैंकिंग, रिपोर्ट, सर्वेक्षण और सूचकांक

भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2019


  • हाल ही में, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने देश के वन संसाधनों का आकलन प्रदान करते हुए द्विवार्षिक “भारत वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) -2019” जारी की।
  • रिपोर्ट में वन आवरण, वृक्ष आवरण, मैंग्रोव आवरण, वन क्षेत्रों के अंदर और बाहर बढ़ते स्टॉक, भारत के वनों में कार्बन स्टॉक, वन प्रकार और जैव-विविधता, वनाग्नि निगरानी और विभिन्न ढलानों और तुंगता (Slopes and Altitude) पर वन आवरण के बारे में जानकारी दी गई है।

उद्देश्य

  • राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर वन आवरण और उसमें बदलाव की निगरानी करना।
  • विभिन्न घनत्व वर्गों में वन आवरण और उसमें परिवर्तन के बारे में जानकारी हासिल करना।
  • पूरे देश के लिए वन आवरण और उससे प्राप्त अन्य विषयगत मानचित्र तैयार करना।
  • बढ़ते स्टॉक, वन कार्बन सहित विभिन्न मापदंडों के आकलन के लिए प्राथमिक आधार प्रदान करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टिंग के लिए शीर्ष स्तर की जानकारी करना।

भारत की वन स्थिति रिपोर्ट (India State of Forest Report - ISFR)

  • रिपोर्ट को भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) द्वारा प्रकाशित किया जाता है, जो द्विवार्षिक चक्र में वन आवरण मानचित्रण के साथ देश के वन और वृक्ष संपदा का आकलन करती है।
  • 1987 से शुरू वन मूल्यांकन की अब तक 15 रिपोर्ट जारी की चुकी हैं। ISFR 2019 श्रृंखला की 16वीं रिपोर्ट है।

प्रमुख निष्कर्ष

कुल वन आवरण

  • देश का कुल वन आवरण 7,12,249 वर्ग किमी. है, जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का 67% है। देश का वृक्ष आवरण 95,027 वर्ग किमी. है, जो भौगोलिक क्षेत्र का 2.89% है।
  • देश का कुल वन और वृक्ष आवरण 8,07,276 वर्ग किमी. है, जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का 56% है।
  • यह ISFR 2017 की तुलना में राष्ट्रीय स्तर पर 3,976 वर्ग किमी. (56%) वन आवरण, 1,212 वर्ग किमी. (1.29%) वृक्ष आवरण और 5,188 वर्ग किमी. (0.65%) वन और वृक्षों के आवरण की वृद्धि को दर्शाता है।

राज्यों में वन आवरण

  • क्षेत्रफल के अनुसार, मध्य प्रदेश में देश का सबसे बड़ा वन क्षेत्र है, इसके बाद अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र हैं।
  • वन आवरण में वृद्धि के मामले में शीर्ष पांच राज्य कर्नाटक (1,025 वर्ग किमी.), आंध्र प्रदेश (990 वर्ग किमी.), केरल (823 वर्ग किमी.), जम्मू और कश्मीर (371 वर्ग किमी.) और हिमाचल प्रदेश (334 वर्ग किमी.) हैं।
  • प्रतिशत के लिहाज से कुल भौगोलिक क्षेत्र के वन आवरण के मामले में, शीर्ष पांच राज्य मिजोरम (41%), अरुणाचल प्रदेश (79.63%), मेघालय (76.33%), मणिपुर (75.46%) और नागालैंड (75.31%) हैं।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में वन आवरण

  • पूर्वोत्तर क्षेत्र में कुल वन क्षेत्र 1,70,541 वर्ग किमी. है, जो इसके भौगोलिक क्षेत्र का 05% है। वर्तमान मूल्यांकन में क्षेत्र में 765 वर्ग किमी. (0.45%) की सीमा तक वन आच्छादन में कमी देखी गई है। असम और त्रिपुरा को छोड़कर, क्षेत्र के सभी राज्य वन आवरण में कमी दर्शाते हैं।

पहाड़ी और जनजातीय जिलों में वन आवरण

  • यह देश के 140 पहाड़ी जिलों में 544 वर्ग किमी. (19%) की वृद्धि दर्शाता है।
  • वर्तमान मूल्यांकन में आदिवासी जिलों में RFA/GW के भीतर 741 वर्ग किमी. वन आवरण की कमी और बाहर 1,922 वर्ग किमी. की वृद्धि दर्शाती है।

मैन्ग्रोव

  • देश में मैंग्रोव आवरण पिछले आकलन की तुलना में 54 वर्ग किमी. (10%) बढ़ा है।
  • मैंग्रोव आवरण में वृद्धि दिखाने वाले शीर्ष तीन राज्य गुजरात (37 वर्ग किमी.), महाराष्ट्र (16 वर्ग किमी.) और ओडिशा (8 वर्ग किमी.) हैं।

कुल कार्बन स्टॉक

  • देश के वनों में कुल कार्बन स्टॉक 7,124.6 मिलियन टन अनुमानित है और 2017 के आकलन की तुलना में देश के कार्बन स्टॉक में 6 मिलियन टन की वृद्धि हुई है। कार्बन स्टॉक में वार्षिक वृद्धि 21.3 मिलियन टन है, जो कि 78.2 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर है।

2019 में भारत के वन एवं वृक्ष आवरण

वर्ग

वन आवरण क्षेत्रफल (वर्ग किमी.)

भौगोलिक क्षेत्रफल का प्रतिशत

अत्यधिक घने वन

99,278

3.02

मध्यम घने वन

3,08,472

9.38

खुले वन (Open Forest

3,04,499

9.26

कुल वन आवरण*

7,12,249

21.67

वृक्ष आवरण

95,027

2.89

कुल वन एवं वृक्ष आवरण

8,07,276

24.56

छोटी झाड़ी

46,297

1.41

गैर-वन#

25,28,923

76.92

कुल भौगोलिक क्षेत्रफल

32,87,469

100.00

*मैन्ग्रोव के तहत 4,975 वर्ग किमी. सहित

#वृक्ष आवरण सहित गैर-वन (प्रतिशत)

 

आर्द्रभूमि

  • 62,466 आर्द्रभूमि हैं, जो देश के रिकॉर्डेड फॉरेस्ट एरिया/ग्रीन वॉश (RFA/GW) के दायरे में 83% है।
  • RFA/GW के भीतर स्थित आर्द्रभूमि की कुल संख्या 13% है। राज्यों में गुजरात का सर्वाधिक और दूसरे स्थान पर पश्चिम बंगाल का आर्द्रभूमि क्षेत्र RFA के अंतर्गत आता है।

आग प्रभावित क्षेत्र

  • वनाग्नि की आवृत्ति के आधार पर 5 किमी. x 5 किमी. के ग्रिड में विभिन्न गंभीरता वर्गों के आग प्रभावित वन क्षेत्रों का मानचित्रण किया गया है। विश्लेषण से पता चलता है कि देश का 40% वन आवरण अत्यधिक अग्नि प्रवण (Fire Prone) है।

 

भारत में हरित आवरण

वर्ष 2019

  • कुल वन आवरण 80.73 मिलियन हेक्टेयर (भौगोलिक क्षेत्र का प्रतिशत – 24.56%

वन क्षेत्र में वृद्धि दर्ज करने वाले शीर्ष तीन राज्य

  • कर्नाटक (1,025 वर्ग किमी.)
  • आंध्रप्रदेश (990 वर्ग किमी.)
  • केरल (823 वर्ग किमी.)

क्षेत्रफल के अनुसार देश में सर्वाधिक वन आवरण वाले राज्य

  • मध्य प्रदेश
  • अरुणाचल प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • ओडिशा
  • महाराष्ट्र

वन आवरण

  • वन आवरण में वे सभी वृक्ष शामिल होते हैं, जिनका 10% से अधिक घनत्व होता है और आकार में 1 हेक्टेयर या उससे अधिक का क्षेत्र होता है, भले ही उनकी कानूनी स्थिति और प्रजातियों की संरचना कैसी भी हो।

रिकार्डेड फारेस्ट एरिया

  • रिकॉर्डेड फारेस्ट एरिया का उपयोग ऐसी सभी भूमियों के लिए किया जाता है, जिन्हें किसी भी सरकारी अधिनियम या नियमों के तहत वन के रूप में अधिसूचित या सरकारी रिकॉर्ड में 'वन' के रूप में दर्ज किया गया हो। रिकॉर्डेड फारेस्ट एरिया में वन आवरण हो भी सकता है या नहीं भी।

ग्रीन वॉश

  • आम तौर पर सर्वेक्षण में काष्ठीय क्षेत्रों (Wooded Area) की सीमा को हल्के हरे रंग में दिखाया जाता है। ग्रीन वॉश का इस्तेमाल उन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के संबंध में RFA के विकल्प के रूप में किया जाता है, जहां से रिकार्डेड फारेस्ट एरिया की प्रयोग करने योग्य डिजिटली सीमाओं को FSI के लिए उपलब्ध नहीं कराया जा सका।

 

रिपोर्ट की महत्ता

  • यह प्रत्येक राज्य से संबंधित जैव विविधता मूल्यांकन, ढलान और तुंगता वाले वन आवरण आदि प्रासंगिक जानकारी प्रदान करता है, जो उनके वन और वृक्ष संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और वृद्धि के लिए नीतियां और रणनीति तैयार करने में बहुत उपयोगी होंगे।
  • रिपोर्ट में बांस संसाधन, वनाग्नि, कार्बन स्टॉक, लोग और वन एवं उनके प्रकार तथा जैव-विविधता पर समर्पित अध्याय शामिल हैं। यह देश के नागरिकों से लेकर नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, प्रशासकों, वन प्रबंधकों, और समुदाय आधारित संगठनों जैसे हितधारकों के लिए बहुत प्रासंगिक होगी।
  • भारत सरकार के डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के अनुरूप, FSI का आकलन काफी हद तक डिजिटल डेटा पर आधारित है चाहे वह उपग्रह डेटा, जिलों की वेक्टर सीमाएं या क्षेत्र माप के डेटा प्रसंस्करण हो।

 

भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI)

मुख्यालय: देहरादून, उत्तराखंड

  • 1981 में स्थापित, यह एक प्रमुख राष्ट्रीय संगठन है, जो नियमित आधार पर देश के वन संसाधनों के मूल्यांकन और निगरानी के लिए जिम्मेदार है।
  • FSI ने 1965 में FAO और UNDP के प्रायोजन से भारत सरकार द्वारा शुरू की गई परियोजना "वन संसाधनों के पूर्व-निवेश सर्वेक्षण" (PISFR) का स्थान लिया है।
  • राष्ट्रीय कृषि आयोग (1976) ने अपनी रिपोर्ट में देश के एक नियमित, आवधिक और व्यापक वन संसाधन सर्वेक्षण के लिए FSI की स्थापना की सिफारिश की थी।

सामयिक खबरें राष्ट्रीय रैंकिंग, रिपोर्ट, सर्वेक्षण और सूचकांक

नीति आयोग का सतत विकास लक्ष्य सूचकांक


30 दिसंबर, 2019 को नीति आयोग ने सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goal - SDG) भारत सूचकांक का दूसरा संस्करण लॉन्च किया, जो 2030 SDG लक्ष्यों को की प्राप्ति की दिशा में भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा की गई प्रगति का व्यापक दस्तावेज है।

उद्देश्य

  • सहकारी संघवाद के ढांचे के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और अनुसरण (emulation) को बढ़ावा देना।

SDG सूचकांक

  • 2018 में पहली बार विकसित SDG भारत सूचकांक सतत विकास लक्ष्यों पर उप-राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियों को प्रस्तुत करने का एक प्रयास था।
  • इस सूचकांक को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI), संयुक्त राष्ट्र (भारत) और ग्‍लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्‍टीट्यूट के सहयोग से विकसित किया गया है।
  • SDG सूचकांक-2018 13 लक्ष्यों पर आधारित था, जबकि SDG सूचकांक-2019 राष्ट्रीय चिन्हित संकेतकों के आधार पर 100 संकेतकों के बीच फैले 54 लक्ष्यों में से 16 लक्ष्यों पर आधारित है और एसडीजी राष्ट्रीय संकेतक फ्रेमवर्क के साथ भी बेहतर रूप से संरेखित है।
  • 16 सतत विकास लक्ष्यों के समग्र प्रदर्शन के आधार पर प्रत्येक राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 0-100 की श्रेणी में एक समग्र स्कोर की गणना की गई, जो 16 SDG और उनके संबंधित लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में प्रत्येक राज्य/केन्द्रशासित प्रदेश के औसत प्रदर्शन को दर्शाता है। यदि कोई राज्य/केंद्रशासित प्रदेश 100 का स्कोर प्राप्त करता है,तो यह दर्शाता है कि उसने 2030 तक के राष्ट्रीय लक्ष्य हासिल किए हैं। राज्य/केंद्रशासित प्रदेश का स्कोर जितना अधिक होगा, वह लक्ष्य प्राप्ति के उतने ही निकट होगा।
  • SDG भारत सूचकांक स्कोर के आधार पर वर्गीकरण मानदंड इस प्रकार है:
  • आकांक्षी (Aspirant): 0–49
  • परफॉर्मर (Performer): 50-64
  • फ्रंट रनर (Front Runner): 65–99
  • अचीवर (Achiever): 100

प्रमुख बिंदु

SDG में भारत का समग्र प्रदर्शन

  • जल एवं स्वच्छता, बिजली और उद्योग में बड़ी सफलता के साथ भारत के समग्र स्कोर में 2018 में 57 से 2019-20 में 60 तक सुधार हुआ।
  • गरीबी के मामले में भारत की रैंकिंग 2018 में 54 अंक से गिरकर 2019 में 50 अंक हो गई है।
  • लक्ष्य 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता), 9 (उद्योग, नवाचार, और बुनियादी ढांचे) और 7 (वहनीय और स्वच्छ ऊर्जा) में अधिकतम लाभ हुआ है।
  • विशेष रूप से दो लक्ष्यों - लैंगिक समानता और शून्य भूख – पर कहीं अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि दोनों लक्ष्यो में देश का स्कोर 50 से कम है।
  • इसके अलावा, आर्थिक विकास के मामले में भारत का स्कोर 65 से 64 तक एक स्थान नीचे खिसक गया है।

राज्य एवं केंद्र-शासित प्रदेशों का प्रदर्शन

  • केरल (70), हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्य हैं।
  • बिहार (50), झारखंड, अरुणाचल प्रदेश ,मेघालय और उत्तर प्रदेश सबसे नीचे के राज्य हैं।
  • केंद्र-शासित प्रदेशों में चंडीगढ़ ने 70 के स्कोर के साथ अपना शीर्ष स्थान बनाए रखा है।
  • उत्तर प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम ने अधिकतम सुधार दिखाया है, लेकिन गुजरात जैसे राज्यों ने 2018 की रैंकिंग की तुलना में कोई प्रगति नहीं दिखाई है।
  • 2019 सूचकांक में, पांच और राज्यों को फ्रंट रनर श्रेणी में शामिल किया गया- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक,सिक्किम और गोवा।

     

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

शीर्ष 12 राज्य

      राज्य              स्कोर

      केरल              70

      हिमाचल प्रदेश       69

      आंध्र प्रदेश          67

      तमिलनाडु           67

      तेलंगाना            67

      कर्नाटक            66

      गोवा               65

      सिक्किम           65

      गुजरात             64

      महाराष्ट्र            64

      उत्तराखंड           64

      पंजाब              62

नीचे से शीर्ष 5 राज्य

      बिहार              50

      झारखंड            53

      अरुणाचल प्रदेश            53

      मेघालय            54

      उत्तर प्रदेश, असम    55

शीर्ष 5 केंद्र-शासित प्रदेश

      चंडीगढ़                                           70

      पुडुचेरी                                           66

      दादरा व नागर हवेली                                63

      लक्षद्वीप                                         63

      दिल्ली, अंडमान व निकोबार द्वीप समूह, दमन व दीव            61

लक्ष्य-वार शीर्ष राज्य/केंद्र- शासित प्रदेश

लक्ष्य 1

गरीबी हटाना

तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख

लक्ष्य 2

शून्य भूखमरी

गोवा और चंडीगढ़

लक्ष्य 3

अच्छा स्वास्थ्य और आरोग्य

केरल और पुडुचेरी

लक्ष्य 4

गुणवत्तापरक शिक्षा

हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़

लक्ष्य 5

लैंगिक समानता

हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख

लक्ष्य 6

स्वच्छ जल एवं सफाई

आंध्र-प्रदेश और चंडीगढ़

लक्ष्य 7

वहनीय एवं स्वच्छ ऊर्जा

सिक्किम और पुडुचेरी

लक्ष्य 8

उचित कार्य एवं आर्थिक विकास

तेलंगाना और चंडीगढ़

लक्ष्य 9

उद्योग, नवाचार एवं अवसंरचना

केरल, गुजरात, दमन व दीव, दिल्ली और दादरा व नागर हवेली

लक्ष्य 10

असमानता में कमी

तेलंगाना और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह

लक्ष्य 11

सतत शहर एवं समुदाय

हिमाचल प्रदेश, गोवा और चंडीगढ़

लक्ष्य 12

सतत उपभोग एवं उत्पादन

नागालैंड और चंडीगढ़

लक्ष्य 13

जलवायु कार्यवाही

कर्नाटक और लक्षद्वीप

लक्ष्य 14

पानी के अन्दर जीवन

कर्नाटक

लक्ष्य 15

भूमि पर जीवन

सिक्किम, मणिपुर, दादरा व नागर हवेली और लक्षद्वीप

लक्ष्य 16

शांति, न्याय एवं मजबूत संस्थान

गुजरात, आंध्रप्रदेश और पुडुचेरी

                                                      स्रोत: नीति आयोग

सूचकांक की महत्ता

  • मूल्यांकन का साधन: सूचकांक SDG एजेंडा को अपनाने और लागू करने में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की प्रगति को जांचने के लिए एक उपयोगी साधन के रूप में कार्य करता है, जहां प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
  • प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान में मदद: यह उप-राष्ट्रीय स्तर पर SDG प्रगति को मापने के लिए एक मजबूत फ्रेमवर्क प्रस्तुत करता है और ऐसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रोत्साहित करता है, जिसमें उन्हें निवेश और सुधार करने की आवश्यकता होती है।
  • बेहतर रणनीति तैयार करना: यह राज्यों को प्रदर्शन में भिन्नता के कारणों को सुलझाने और 2030 तक SDG प्राप्त करने के लिए बेहतर रणनीति तैयार करने में मदद करेगा।
  • सरकार के मिशन के साथ जुड़ाव: सूचकांक SDG को सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास,सबका विश्वास’ के आह्वान के साथ जोड़ने हेतु एक सेतु के रूप में कार्य करता है, जोकि वैश्विक SDG आंदोलन के पांच P’s लोग, ग्रह , समृद्धि , साझेदारी और शांति का प्रतीक है।

 

सूचकांक की सीमाएं

  • सूचकांक राज्य/केंद्रशासित प्रदेश स्तर पर उपयुक्त डेटा की अनुपलब्धता के कारण SDG 17 के संकेतक को नहीं मापता है। हालांकि, SDG 17 के तहत प्रगति का गुणात्मक मूल्यांकन शामिल किया गया है।
  • राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के आंकड़ों की अनुपलब्धता के कारण राष्ट्रीय संकेतक फ्रेमवर्क (NIF) का पूरा सेट शामिल नहीं किया जा सका।
  • डेटा तुल्यता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों के सांख्यिकीय प्रणाली और गैर-सरकारी स्रोतों से संकेतक और डेटा को शामिल नहीं किया गया है।
  • संकेतकों के नवीनतम मूल्यों (Latest Values) का उपयोग किया गया है, उनमें से अधिकतर 2015 और 2018 के बीच के हैं।
  • SDG भारत सूचकांक 2018 (62 संकेतक) की तुलना में SDG भारत सूचकांक 2019-20 के लिए निर्धारित संकेतक बड़ा (100 संकेतक) है, इसलिए दोनों सूचकांक तुलनीय नहीं हैं।

आगे की राह

  • भारत, विश्व की 17 प्रतिशत आबादी के साथ, विकास के कई क्षेत्रों में कई चुनौतियों का सामना करता है, चाहे वह स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, स्वच्छता और बुनियादी ढांचा हो। हालांकि, ये चुनौतियां भारत को इनके अभिनव समाधान विकसित करने के लिए भी अनुकूल बनाती हैं और विश्व के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की समस्याओं को हल करने के लिए एक उपयोगी दृष्टिकोण प्रदान करती हैं।
  • भारत निर्धारित समयसीमा के भीतर वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। देश इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि यदि भारत SDG को पूरा नहीं करता है, तो विश्व उन्हें हासिल करने से दूर होगा।
  • इस दिशा में, SDG सूचकांक एक शक्तिशाली साधन है, जो राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को ऐसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने की उत्कृष्ट संभावनाएं प्रदान करते हैं, जो कार्रवाई की मांग करते हैं ,सीखने की सुविधा देते हैं, आंकड़ों के अंतर को उजागर करते हैं।

सामयिक खबरें राष्ट्रीय अवसंरचना

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन


31 दिसंबर, 2019 को सरकार ने राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) के तहत 102 लाख करोड़ रुपये की आधारभूत परियोजनाओं का अनावरण किया, जो कि अगले पांच वर्षों में अवसंरचना क्षेत्र में सरकार के खर्च के हिस्से के रूप में लागू किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • प्रधानमंत्री ने वर्ष 2019 के अपने स्‍वतंत्रता दिवस संबोधन में इस बात पर प्रकाश डाला था कि अगले पांच वर्षों में बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के विकास पर 100 लाख करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे, जिसमें सामाजिक एवं आर्थिक अवसंरचना परियोजनाएं भी शामिल हैं।
  • इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए वित्त वर्ष 2019-20 से 2024-25 तक प्रत्येक वर्ष के लिए राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) को तैयार करने हेतु सितंबर 2019 में आर्थिक कार्य विभाग (DEA) में सचिव की अध्यक्षता में एक कार्य-बल (Task Force) का गठन किया गया था।
  • नीति आयोग के सीईओ, व्‍यय विभाग के सचिव, प्रशासनिक मंत्रालयों के सचिव और आर्थिक मामले विभाग में अपर सचिव (निवेश) इसके सदस्य जबकि आर्थिक कार्य विभाग में संयुक्‍त  सचिव (अवसंरचना नीति और वित्त प्रभाग) इसके सदस्य सचिव थे।

कार्यबल के विचारार्थ विषय

  • 2020 से 2025 के बीच शुरू की जा सकने वाली तकनीकी और वित्तीय/आर्थिक रूप से व्यवहार्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की पहचान करना।
  • वार्षिक अवसंरचना निवेश/पूंजी लागत का अनुमान लगाना।
  • वित्त-पोषण के उपयुक्त स्रोतों की पहचान करने में मंत्रालयों का मार्गदर्शन करना।
  • परियोजनाओं की निगरानी के लिए उपाय सुझाना ताकि लागत और समय की अधिकता कम से कम हो।

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP)

  • यह अनुमान है कि भारत को अपनी विकास दर को बनाए रखने के लिए 2030 तक बुनियादी ढांचे पर 5 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने की आवश्यकता होगी। NIP का प्रयास इस लक्ष्य को कुशल तरीके से प्राप्त करना है।
  • NIP में 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड परियोजनाएं शामिल होंगी।
  • चालू वर्ष के लिए पाइपलाइन में शामिल करने के लिए अन्य योग्यताओं में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की उपलब्धता, कार्यान्वयन की व्यवहार्यता, वित्त पोषण योजना में समावेश और प्रशासनिक स्वीकृति की तत्परता/उपलब्धता शामिल होगी।
  • परियोजनाओं के समयबद्ध और लागत के अनुसार कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु प्रत्येक मंत्रालय/विभाग परियोजनाओं की निगरानी के लिए जिम्मेदार होंगे।

उद्देश्य

  • नई अवसंरचना परियोजना और मौजूदा बुनियादी ढांचे को अद्यतन कर बदलती जनसांख्यिकीय प्रोफाइल की आकांक्षाओं को पूरा करना तथा भारत में जीवन शैली की गुणवत्ता और सुगमता को वैश्विक स्तर पर लाना।

अवसंरचना दृष्टिकोण 2025

आकांक्षाओं को पूरा करना, विकास को बढ़ावा देना, जीवन सुगमता प्रदान करना

सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा

  • 24x7 बिजली की उपलब्धता: परिवहन के लिए हरित और स्वच्छ नवीकरणीय ऊर्जा एवं पर्यावरण-अनुकूल ईंधन के माध्यम से प्रदूषण को कम करना।

डिजिटल सेवाएं: सभी के लिए पहुंच

  • प्रत्येक नागरिक के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण हेतु दूरसंचार और उच्च गुणवत्ता वाले ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए 100% जनसंख्या कवरेज; सरकारी सेवाओं का ऑनलाइन वितरण।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

  • विश्व स्तर के शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, प्रौद्योगिकी-संचालित शिक्षा।

सुविधाजनक और कुशल परिवहन

  • सुदूर क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क मे सुधार और एक्सप्रेसवे, प्रमुख आर्थिक गलियारों, रणनीतिक क्षेत्रों और पर्यटन स्थलों के माध्यम से कनेक्टिविटी।
  • विश्व स्तरीय स्टेशनों और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए अंतर-मोडल कनेक्टिविटी और शून्य दुर्घटनाओं के साथ पूरी तरह से एकीकृत रेल नेटवर्क
  • सभी टियर II और अधिकांश टियर III शहरों के लिए हवाई संपर्क
  • नए रोजगार सृजन हेतु बंदरगाह-आधारित विकास, त्वरित प्रतिवर्तन काल (Turnaround Time) के साथ लॉजिस्टिक लागत में कमी।
  • कम से कम 25 शहरों में मेट्रो कनेक्टिविटी प्रदान कर नागरिकों के लिए उच्च जीवन स्तर।

सभी के लिए आवास और पानी की आपूर्ति

  • PMAY की मदद से झुग्घियों को समाप्त करना।
  • सभी घरों में 24X7 पाइप जल आपूर्ति।
  • अधिकांश अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रीकरण और उपचार।

आपदा-लचीला मानक अनुपालन वाली सार्वजनिक अवसंरचना

  • आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन CDRI

किसान की आय दोगुनी करना

  • भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन बुनियादी ढांचे के साथ सिंचाई (83%) की वृद्धि

अच्छी सेहत और आरोग्य

  • बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड अवसंरचना

अन्य प्रमुख क्षेत्र

  • इसके अंतर्गत अन्य प्रमुख फोकस क्षेत्र सड़कें (19%) , रेलवे (13%), शहरी अवसंरचना (16%), ग्रामीण अवसंरचना (8%) और सिंचाई (8%) हैं।
  • स्वास्थ्य और शिक्षा सहित सामाजिक अवसंरचना पर पूंजीगत व्यय का 3% खर्च किया जाएगा, साथ ही डिजिटल संचार और औद्योगिक व्यय हेतु प्रत्येक को समान राशि मिलेगी।
  • कृषि और खाद्य प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे पर नियोजित पूंजीगत व्यय का 1% खर्च किया जाएगा।

NIP का क्षेत्रवार विवरण (लाख करोड़ रुपए में मूल्य)

खाद्य प्रसंस्करण

0.01

खेल

0.08

स्टील

0.08

पर्यटन

0.24

स्कूली शिक्षा

0.38

कृषि

0.54

बंदरगाह

1.01

उच्च शिक्षा

1.18

हवाई अड्डों

1.43

परमाणु ऊर्जा

1.54

स्वास्थ्य

1.69

पेट्रोलियम प्राकृतिक गैस

1.95

औद्योगिक गलियारे

2.99

डिजिटल अवसंरचना

3.20

पेयजल

3.62

ग्रामीण अवसंरचना

4.11

सिंचाई

7.73

अक्षय ऊर्जा

9.30

परंपरागत ऊर्जा

11.76

रेलवे

13.69

शहरी और आवास

16.29

सड़क

19.64

·         सड़क, शहरी और आवास, रेलवे, बिजली (नवीकरणीय और पारंपरिक) और सिंचाई में NIP का 80% शामिल है।

परियोजना का प्रभाव

अर्थव्यवस्था

  • सुनियोजित राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन अवसंरचना परियोजनाओं को अधिक सक्षम बनाकर ,व्यवसायों में वृद्धि, रोजगार सृजन , जीवनयापन में सुगमता और बुनियादी ढांचे तक सभी की समान पहुंच प्रदान कर, विकास को और अधिक समावेशी बनाएगी।

सरकार

  • सुविकसित बुनियादी ढांचा आर्थिक गतिविधि के स्तर को बढ़ाने, सरकार के राजस्व आधार में सुधार करके अतिरिक्त वित्तीय संसाधन प्रदान करने और उत्पादक क्षेत्रों में केंद्रित व्यय की गुणवत्ता को मजबूत करने में मदद करता है।

डेवलपर्स

  • परियोजनाओं को पूरा करने के संबंध में बेहतर दृष्टिकोण, परियोजना में बोली लगाने के लिये तैयारी हेतु पर्याप्त समय के साथ ही परियोजना के असफल होने जैसी आशंका को कम करता है तथा निवेशकों के आत्मविश्वास में वृद्धि द्वारा वित्तीय स्रोतों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करता है।

बैंक/वित्तीय संस्थान (FI)/ निवेशक

  • यह कार्यक्रम परियोजनाओं की बेहतर तरीके से तैयारी के माध्यम से निवेशकों के विश्वास को बढ़ाता है तथा सक्रिय परियोजना निगरानी के माध्यम से दबाव को कम करता है, जिससे गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (Non-Performing Assets – NPAs) की संभावना कम होती है।

आगे की राह

  • 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को पूरा करने हेतु तेजी से विकास के लिए अधिक आपूर्ति-पक्ष सुधारों की आवश्यकता है। नई अवसंरचना और मौजूदा बुनियादी ढांचे मे सुधार भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
  • यह ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम की सफलता के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता बुनियादी ढांचे पर निर्भर करती है। बुनियादी ढांचे का विकास अल्पकालिक वृद्धि दर के साथ ही जीडीपी वृद्धि की संभावित दर को बढ़ाएगा।
  • अवसंरचना परियोजनाओं में श्रम-बल की आवश्यकता होगी, जो अर्थव्यवस्था में रोजगार और आय सृजन के साथ ही घरेलू मांग को बढ़ाएगा। बेहतर लॉजिस्टिक और नेटवर्क के माध्यम से बेहतर बुनियादी ढांचे की क्षमता से अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा, जिससे अर्थव्यवस्था में अधिक निवेश विकास और रोजगार सृजन के चक्र में मदद मिल सकती है।