एशिया की बढ़ती आपदा लागत और भारत की वार्षिक GDP हानि
- 05 Jan 2026
4 जनवरी, 2026 को प्रकाशित OECD की रिपोर्ट एवं संबंधित आंकड़ों के आधार पर उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं (भारत, चीन और ASEAN-11) में प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता तेजी से बढ़ रही है, जिससे आर्थिक जोखिम बढ़ा है।
मुख्य तथ्य:
- आपदाओं की आवृत्ति: 1950-2024 के दौरान उभरते एशिया में बाढ़, तूफ़ान, भूकंप, सूखा और ज्वालामुखीय गतिविधि जैसी आपदाओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई; पिछले दशक में प्रति वर्ष औसतन 100 आपदाएँ दर्ज हुईं, जिनसे लगभग 8 करोड़ लोग प्रतिवर्ष प्रभावित हुए।
- जोखिम की भौगोलिक प्रकृति: भारत में मुख्य जोखिम हाइड्रोलॉजिकल (गैर-चक्रवाती बाढ़, भूस्खलन) से, जबकि म्यानमार में मुख्यतः मौसमीय (अत्यधिक तापमान, चक्रवात) आपदाओं से जुड़ा है; चीन व इंडोनेशिया में भूकंपीय व ज्वालामुखीय जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हैं।
- आर्थिक नुकसान: 1980-2024 के बीच उभरते एशियाई देशों में आपदा-जनित कुल क्षति सैकड़ों अरब डॉलर तक पहुँच गई; 1990-2024 के दौरान भारत की औसत वार्षिक आपदा-जनित आर्थिक क्षति उसके GDP के लगभग 0.4–0.42% के बराबर आँकी गई है।
- जोखिम सूचकांक में स्थिति: वर्ल्ड रिस्क इंडेक्स 2025 के अनुसार, उभरते एशियाई देशों में भारत जोखिम के मामले में केवल फिलीपींस से पीछे है और अब वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है, जबकि इंडोनेशिया उससे नीचे आ गया है।
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