पश्चिमी भारत की रेगिस्तानी धूल से हिमालय में स्वास्थ्य जोखिम
- 28 Jan 2026
जनवरी 2026 में किए गए एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया है कि पश्चिमी भारत से उठने वाली रेगिस्तानी धूल की परतों में मौजूद वायुजनित रोगजनक सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर पूर्वी हिमालय तक पहुँच रहे हैं। यह स्थिति उच्च-ऊँचाई वाले क्षेत्रों में श्वसन, त्वचा और जठरांत्र संबंधी रोगों में योगदान कर सकती है।
मुख्य बिंदु
- लंबी दूरी तक धूल का परिवहन: शोधकर्ताओं ने पश्चिमी भारत के शुष्क क्षेत्रों से उठने वाले धूल तूफ़ानों (dust storms) को ट्रैक किया, जो इंडो-गंगा मैदानी क्षेत्र से होकर गुजरते हैं और अंततः हिमालयी पहाड़ियों पर जम जाते हैं।
- रोगजनक ले जाने की क्षमता: इन धूल परतों में बैक्टीरिया पाए गए, जिनमें रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणु भी शामिल हैं, जो हिमालय के उच्च-ऊँचाई वाले वातावरण तक पहुँच जाते हैं।
- उच्च-ऊँचाई वाले क्षेत्रों की संवेदनशीलता: हिमालय की आबादी पहले से ही ठंडे मौसम और कम ऑक्सीजन स्तर के कारण संवेदनशील है, जिससे हवा में मौजूद सूक्ष्मजीवों से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाता है।
- स्थानीय और बाह्य स्रोत: मरुस्थलीय रोगजनकों के अलावा, हिमालय की तलहटी से उठने वाले स्थानीय रोगजनक वायुमंडल में ऊर्ध्वाधर गति के साथ मिलते हैं और आने वाली धूल में मौजूद बैक्टीरिया के साथ मिश्रित हो जाते हैं।
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