NDCT नियमों में संशोधन: औषधि विकास और अनुसंधान को गति
- 28 Jan 2026
जनवरी 2026 में, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नवीन औषधि एवं नैदानिक परीक्षण नियम, 2019 (NDCT Rules) में महत्त्वपूर्ण संशोधन अधिसूचित किए। इनका उद्देश्य औषधि विकास की समय-सीमा को कम करना और भारत के नैदानिक अनुसंधान एवं औषधि विकास पारिस्थितिक तंत्र को सुदृढ़ बनाना है।
मुख्य बिंदु
- नियामकीय सरलीकरण: संशोधनों का लक्ष्य नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनुमोदन समय-सीमा घटाना और औषधि क्षेत्र में व्यापार सुगमता को बढ़ावा देना है।
- समय-सीमा में कमी: औषधि विकास जीवनचक्र में न्यूनतम 90 दिन की बचत होगी। जिन श्रेणियों में परीक्षण लाइसेंस आवश्यक है, वहाँ प्रक्रिया समय 90 दिन से घटाकर 45 दिन कर दिया गया है।
- परीक्षण लाइसेंस सुधार: गैर-व्यावसायिक औषधि निर्माण हेतु परीक्षण लाइसेंस प्राप्त करने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। अब इसके स्थान पर केवल CDSCO को पूर्व ऑनलाइन सूचना देनी होगी, सिवाय उच्च-जोखिम वाली औषधियों जैसे साइटोटॉक्सिक, मादक और मनोदैहिक पदार्थों के।
- नियामकीय बोझ में कमी: CDSCO हर साल लगभग 30,000–35,000 टेस्ट लाइसेंस आवेदन प्रक्रिया करता है। नई व्यवस्था से नियामकों और उद्योग पर प्रक्रियात्मक बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी।
- सरलीकृत प्रक्रिया: कुछ निम्न-जोखिम वाले जैव-उपलब्धता और जैव-समतुल्यता अध्ययन (bioavailability and bioequivalence studies) के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है। अब ये केवल ऑनलाइन सूचना देकर प्रारंभ किए जा सकेंगे, जिससे जेनेरिक औषधि उद्योग को लाभ होगा।
- डिजिटल सुविधा: राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम और सुगम पोर्टल पर समर्पित ऑनलाइन मॉड्यूल शुरू किए जाएंगे, ताकि सूचनाओं का पारदर्शी और सुगम प्रस्तुतीकरण सुनिश्चित हो सके।
- बेहतर नियामकीय निगरानी: सुधारों से CDSCO को जनशक्ति का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी, जिससे नियामकीय निगरानी की दक्षता और प्रभावशीलता बढ़ेगी तथा जनस्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
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