भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता
- 28 Jan 2026
27 जनवरी, 2026 को भारत और यूरोपीय संघ ने व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर वार्ताएँ सम्पन्न कीं। इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है, जो द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक पड़ाव है।
मुख्य बिंदु
- ऐतिहासिक समझौता: यह FTA यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष की भारत यात्रा के दौरान घोषित किया गया, जो भारत–EU संबंधों में एक निर्णायक क्षण को दर्शाता है।
- आर्थिक महत्व: विश्व की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ने वाला यह समझौता 24 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के संयुक्त बाजार का निर्माण करता है, जो लगभग 2 अरब लोगों को लाभान्वित करेगा।
- भारतीय निर्यात के लिए बाजार पहुँच: भारत को EU की 97% टैरिफ लाइनों पर वरीयता प्राप्त होगी, जो उसके निर्यात मूल्य का 99.5% कवर करती है। इनमें से 70% से अधिक टैरिफ लाइनों पर तुरंत शुल्क समाप्त कर दिया जाएगा।
- श्रम-गहन क्षेत्रों को बढ़ावा: शून्य-शुल्क पहुँच से वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, खिलौने, खेल सामग्री, चाय, कॉफी और मसाले जैसे क्षेत्रों को लाभ होगा, जिससे रोज़गार और MSME वृद्धि को समर्थन मिलेगा।
- EU को भारतीय बाजार की पहुँच: भारत ने अपनी 92.1% टैरिफ लाइनों पर बाज़ार पहुँच की पेशकश की है, जो EU के 97.5% निर्यात को कवर करती है, जिसमें तत्काल और चरणबद्ध शुल्क उदारीकरण शामिल है।
- कृषि और ग्रामीण लाभ: चाय, कॉफी, मसाले, फल, सब्ज़ियाँ और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे उत्पादों को वरीयता दी गई है, जबकि डेयरी और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षित रखा गया है।
- पारंपरिक चिकित्सा और नवाचार: यह समझौता EU में AYUSH सेवाओं के नए अवसर खोलेगा, TRIPS-अनुरूप बौद्धिक संपदा संरक्षण को सुदृढ़ करेगा, और भारत की पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी का समर्थन करेगा।
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