ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026
- 17 Mar 2026
13 मार्च, 2026 को लोक सभा में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया गया, जिसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 में संशोधन करना है।
मुख्य बिंदु
- परिभाषा में परिवर्तन: प्रस्तावित संशोधन में ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा को संशोधित किया गया है।
- इसमें निम्न सामाजिक-सांस्कृतिक पहचानों को शामिल किया गया है:
- किन्नर
- हिजड़ा
- अरावणी (Aravani)
- जोगता/जोगप्पा
- बधिया (Eunuch)
- साथ ही इसमें शामिल हैं:
- अंतरलिंगी भिन्नताएँ (Intersex Variations) वाले व्यक्ति
- जैविक विशेषताओं में जन्मजात भिन्नता (Congenital Variations) वाले व्यक्ति
- स्व-धारित लैंगिक पहचान का निष्कासन: विधेयक में 2019 के अधिनियम में शामिल स्व-धारित लैंगिक पहचान से संबंधित प्रावधानों को हटा दिया गया है।
- अपवर्जन प्रावधान: नई परिभाषा के अनुसार विभिन्न यौन अभिविन्यास (Sexual Orientation) और स्व-धारित लैंगिक पहचान वाले व्यक्ति ट्रांसजेंडर की परिभाषा में शामिल नहीं होंगे।
- प्रमाणन प्राधिकरण: विधेयक में “प्राधिकरण (Authority)” की परिभाषा दी गई है। यह एक चिकित्सा बोर्ड होगा, जिसका नेतृत्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) या उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी (Deputy CMO) द्वारा किया जाएगा।
- जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका: संशोधन के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट (DM) को यह अधिकार दिया गया है कि वे प्राधिकरण और चिकित्सा विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर ट्रांसजेंडर प्रमाण-पत्र जारी करने या न करने का निर्णय लें।
- नए अपराध प्रावधान: विधेयक में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के विरुद्ध निम्न अपराधों को परिभाषित किया गया है:
- सार्वजनिक स्थानों तक पहुँच से वंचित करना
- बंधुआ श्रम के लिए मजबूर करना
- घर छोड़ने के लिए बाध्य करना
- बच्चों के लिए संरक्षण: किसी बच्चे को बलपूर्वक या प्रलोभन देकर ट्रांसजेंडर पहचान अपनाने के लिए बाध्य करना दंडनीय अपराध होगा।
- इसके लिए दंड:
- 10–14 वर्ष का कठोर कारावास।
- अधिकतम ₹3 लाख का जुर्माना।
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