दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025

  • 31 Mar 2026

30 मार्च, 2026 को लोक सभा ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 [Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) Bill, 2025] पारित किया।

  • इसका लक्ष्य भारत के दिवालियापन समाधान ढाँचे को मज़बूत करना है।

संशोधन के उद्देश्य

  • दिवालियापन समाधान में दक्षता और सुशासन सुधारना।
  • IBC, 2016 को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाना।
  • हितधारकों के लिए अधिकतम मूल्य सुनिश्चित करना।

मुख्य संशोधन

  • लघु फर्मों के लिए फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के स्थान पर ऋणदाता-नेतृत्व (creditor-led) ढांचा
  • न्यायालय के बाहर समाधान (out-of-court settlement) का प्रावधान।
  • सुरक्षा उपायों के साथ ‘ऋणी-अधिकार’ (debtor-in-possession) मॉडल को अपनाना

संरचनात्मक सुधार

  • समूह दिवालियेपन (group insolvency) के लिए प्रावधान।
  • बहु-क्षेत्राधिकार मामलों हेतु सीमा-पार दिवालियापन (cross-border insolvency) ढांचा

पारदर्शिता उपाय

  • ऋणदाताओं की समिति (CoC) को निर्णयों के कारण दर्ज करने होंगे।
  • समाधान प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ेगी।

बैंकिंग क्षेत्र पर प्रभाव

  • कुल वसूली: ₹1,04,099 करोड़
  • IBC के माध्यम से वसूली: ₹54,528 करोड़ (लगभग 52.3%)।
  • तनावग्रस्त परिसंपत्तियों का समाधान मज़बूत हुआ।

महत्त्व

  • निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा।
  • व्यवसाय सुगमता को बढ़ावा देगा।
  • दिवालियापन समाधान को अधिक दक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध बनाएगा।