भारत में अप्रैल 2026 से पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना
- 31 Mar 2026
30 मार्च, 2026 को सरकार ने घोषणा की कि भारत 1 अप्रैल, 2026 से अपनी पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना प्रारंभ करेगा, जो डेटा संग्रहण एवं शासन प्रणाली के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव है।
मुख्य बिंदु
- डिजिटल मोड: डेटा संग्रह मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से किया जाएगा।
- स्व-गणना (Self-Enumeration): नागरिकों के लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी भरने का विकल्प होगा (यह सुविधा 16 भाषाओं में उपलब्ध होगी)।
- प्रक्रिया: नागरिक ऑनलाइन विवरण भरकर एक स्व-गणना ID (SE ID) जनरेट कर सकते हैं, जिसे बाद में फील्ड विज़िट के दौरान प्रगणकों (enumerators) द्वारा सत्यापित किया जाएगा।
विश्व का सबसे बड़ा जनगणना अभ्यास
- इसमें 30 लाख (3 million) से अधिक प्रगणक और अधिकारी शामिल होंगे।
- कवरेज: 36 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, लगभग 6.4 लाख गाँव और हज़ारों शहर।
दो-चरणीय जनगणना प्रक्रिया
- जनगणना दो मुख्य चरणों में पूरी की जाएगी:
- प्रथम चरण (अप्रैल-सितंबर 2026): मकान सूचीकरण और आवास संबंधी डेटा।
- द्वितीय चरण (फरवरी 2027): जनसंख्या गणना, सामाजिक-आर्थिक और जातिगत डेटा।
- संदर्भ तिथियाँ: सामान्य क्षेत्रों के लिए 1 मार्च, 2027 और हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए 1 अक्टूबर, 2026।
कानूनी और वित्तीय ढांचा
- कानून: यह जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत आयोजित की जाएगी।
- बजट: इसके लिए ₹11,718.24 करोड़ का वित्तीय परिव्यय स्वीकृत किया गया है।
- डिजिटल बुनियादी ढांचा: मोबाइल ऐप, स्व-गणना पोर्टल, रीयल-टाइम डैशबोर्ड और जनगणना ब्लॉकों के लिए वेब-आधारित मैपिंग का उपयोग किया जाएगा।
महत्व
- सटीकता: डेटा की सटीकता, पारदर्शिता और समयबद्धता में सुधार होगा।
- भागीदारी: नागरिकों की सीधी भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।
- नीति निर्माण: यह बेहतर नीति-निर्माण और विकास योजनाओं के लिए ठोस डेटा आधार प्रदान करेगा।
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