दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026

  • 02 Apr 2026

1 अप्रैल, 2026 को संसद ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 [Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) Bill, 2026] पारित किया। यह विधेयक भारत की दिवाला समाधान प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने तथा प्रक्रियागत चुनौतियों को दूर करने के उद्देश्य से लाया गया है।

मुख्य बिंदु

  • संशोधनों का उद्देश्य:
    • समाधान प्रक्रिया में होने वाली देरी और व्याख्यात्मक समस्याओं का समाधान करना।
    • दिवाला समाधान ढाँचे को अधिक सुदृढ़ बनाना।
    • वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप प्रणाली को विकसित करना।
  • प्रमुख प्रावधान:
    • कुल 12 संशोधन किए गए हैं (11 चयन समिति द्वारा तथा 1 सरकार द्वारा)।
    • अवॉइडेंस ट्रांजैक्शन्स के लिए लुक-बैक अवधि को बढ़ाकर 2 वर्ष किया गया है।
    • ऋणदाताओं की समिति (CoC) को अपने निर्णयों के कारणों को अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा।
  • IBC का प्रदर्शन:
    • अब तक 1,376 कंपनियों का सफल समाधान किया जा चुका है।
    • ऋणदाताओं द्वारा कुल ₹4.11 लाख करोड़ की वसूली की गई है।
    • वित्तीय ऋणदाताओं को अपने दावों का 64% से अधिक प्राप्त हुआ है।
  • बैंकिंग क्षेत्र पर प्रभाव:
    • गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) से कुल ₹1.04 लाख करोड़ की वसूली हुई है।
    • इसमें IBC का योगदान ₹54,528 करोड़ रहा है।
    • 2016 के बाद से सकल NPAs में उल्लेखनीय कमी आई है।