भारत के अनौपचारिक निर्माण क्षेत्र पर MoSPI का अध्ययन
- 11 Apr 2026
10 अप्रैल, 2026 को केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने भारत के गैर-निगमित निर्माण क्षेत्र (Unincorporated Construction Sector) पर एक विस्तृत पायलट अध्ययन जारी किया, जो देश के रोजगार और आर्थिक तंत्र में इसके व्यापक योगदान को सामने लाता है।
मुख्य बिंदु
- अध्ययन का अवलोकन: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा किया गया यह अध्ययन, भारतीय अर्थव्यवस्था के इस असंगठित क्षेत्र पर दशकों में किया गया पहला सबसे व्यापक अभ्यास है।
- घरेलू निर्माण गतिविधि की विशालता: लगभग 98.54 लाख परिवारों ने स्वयं के उपयोग के लिए निर्माण कार्य किया, जो देश भर में स्व-संचालित आवास निर्माण की विशाल लहर को दर्शाता है।
- गैर-निगमित प्रतिष्ठानों की स्थिति: इस क्षेत्र में लगभग 10.27 लाख प्रतिष्ठान पूरी तरह सक्रिय हैं। इनमें से लगभग 77% प्रतिष्ठान कम से कम एक वेतनभोगी कर्मचारी को नियुक्त करते हैं, और प्रति प्रतिष्ठान औसत रोजगार लगभग 5 श्रमिकों का है।
- रोजगार सृजन के मजबूत रुझान: घरेलू निर्माण कार्यों में औसतन 4 मजदूर लगे हुए हैं, जो जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने में इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को साबित करता है।
- आर्थिक एवं वित्तीय संकेतक: प्रति प्रतिष्ठान औसत अचल संपत्ति ₹5.21 लाख आंकी गई है, जबकि औसत बकाया ऋण ₹1.40 लाख है।
- उत्पादकता मेट्रिक्स: प्रति प्रतिष्ठान GVA (सकल मूल्य वर्धित) ₹7.98 लाख और कुल आउटपुट ₹16.25 लाख दर्ज किया गया है।
- वित्तपोषण के स्रोत: 97% परिवार निर्माण के लिए अपनी खुद की आय या बचत पर निर्भर हैं, केवल 21% ही संस्थागत ऋण तक पहुंच पाते हैं। शहरी क्षेत्रों (13%) की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों (23%) में ऋण लेने की भागीदारी अधिक है।
- लागत की संरचना: कुल निर्माण लागत में सामग्री का सबसे बड़ा हिस्सा लगभग 75% है, जबकि श्रम का योगदान 22% है। सामग्री की कुल लागत में ईंट, सीमेंट और स्टील की हिस्सेदारी ही लगभग 60% बैठती है।
- सर्वेक्षण की पृष्ठभूमि: यह व्यापक सर्वेक्षण जुलाई-दिसंबर 2025 के बीच आयोजित किया गया था, जिसमें 19,000 से अधिक घरों और लगभग 5,000 प्रतिष्ठानों को कवर किया गया।
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