SAF-मिश्रित ईंधन को ATF नियंत्रण आदेश के दायरे में लाया गया

  • 25 Apr 2026

17 अप्रैल, 2026 को केंद्र सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) (मार्केटिंग विनियमन) आदेश, 2001 में संशोधन की अधिसूचना जारी करते हुए सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) के साथ मिश्रित ATF को इस आदेश के तहत नियामक दायरे में शामिल किया।

मुख्य बिंदु

  • नीतिगत संशोधन:
    • SAF-मिश्रित ATF को ATF (मार्केटिंग का विनियमन) आदेश, 2001 के दायरे में लाया गया।
    • यह ATF की परिभाषा को केवल पेट्रोलियम-आधारित ईंधन से आगे विस्तार देता है।
  • सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) क्या है?
    • यह फसलों, अपशिष्ट और अवशेषों से प्राप्त नवीकरणीय विमानन ईंधन है।
    • यह रासायनिक रूप से पारंपरिक ईंधन के समान है और विमान के इंजनों के लिए पूरी तरह से अनुकूल है।
  • मानक और प्रमाणन:
    • इसका BIS मानकों (IS 1571, IS 17081) पर खरा उतरना अनिवार्य है।
    • अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानदंडों के तहत कठोर परीक्षण की आवश्यकता।
  • वैश्विक ढांचा:
    • यह ICAO की ‘अंतरराष्ट्रीय विमानन हेतु कार्बन ऑफसेटिंग एवं न्यूनीकरण योजना’ (CORSIA) का समर्थन करता है।
    • इसका अनिवार्य चरण 2027 में शुरू होगा।
  • भारत के SAF लक्ष्य:
    • 2027 तक 1% सम्मिश्रण।
    • 2028 तक 2% सम्मिश्रण।
    • 2030 तक 5% सम्मिश्रण।
  • वैश्विक संदर्भ:
    • यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, जापान और सिंगापुर SAF से संबंधित अनिवार्यता/प्रोत्साहन लागू कर रहे हैं।
    • यह सतत विमानन ईंधनों की दिशा में वैश्विक परिवर्तन को दर्शाता है।
  • संशोधन का महत्व:
    • SAF सम्मिश्रण लक्ष्यों के क्रियान्वयन को संभव बनाता है।
    • भारत को वैश्विक SAF आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply chains) में एकीकृत करता है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव:
    • विमानन क्षेत्र से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करता है।
    • कार्बन ऑफसेट (Carbon offset) आवश्यकताओं को कम करने में मदद करता है।