नाबालिग को 31 सप्ताह का गर्भ समाप्त करने की अनुमति
- 25 Apr 2026
24 अप्रैल, 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने एक 15 वर्षीय लड़की को उसके 31 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने इस फैसले में नाबालिग के मौलिक अधिकारों और गरिमा (Dignity) को प्राथमिकता दी।
मुख्य बिंदु
- कानूनी आधार:
- प्रजनन स्वायत्तता (Reproductive Autonomy) अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का हिस्सा है।
- इसमें गरिमा, निजता (Privacy) और व्यक्तिगत स्वतंत्रता शामिल है।
- प्रमुख टिप्पणियाँ:
- "किसी भी महिला, विशेष रूप से नाबालिग को गर्भ धारण करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।"
- अदालत ने मनोवैज्ञानिक संकट और आत्महत्या के प्रयासों जैसी गंभीर स्थितियों पर जोर दिया।
- असाधारण परिस्थितियाँ:
- अदालत ने प्रक्रियात्मक सीमाओं के बजाय नाबालिग के सर्वोत्तम हितों को प्राथमिकता दी।
- गंभीर मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक प्रभाव को मान्यता दी गई।
- अदालत का रुख:
- अधिकारों के बदले वित्तीय मुआवजे के विकल्प को खारिज कर दिया।
- यह भी रेखांकित किया कि अक्सर भय या जागरूकता के अभाव के कारण कानूनी प्रक्रिया में देरी होती है।
- व्यापक प्रभाव एवं महत्व:
- यह निर्णय प्रजनन अधिकारों को मौलिक अधिकार के रूप में पुनः पुष्ट करता है।
- शारीरिक स्वायत्तता (Bodily Autonomy) पर न्यायिक रुख को मजबूत करता है।
- अनुच्छेद 21 की व्याख्या का विस्तार करता है।
- कठोर कानूनी सीमाओं के ऊपर गरिमा और कल्याण (Well-being) को प्राथमिकता देता है।
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