फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशंस की फेज-II रैंकिंग जारी

  • 25 Apr 2026

24 अप्रैल, 2026 को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा अनुमोदित फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशंस (FTOs) की रैंकिंग के दूसरे चरण को जारी किया।

मुख्य बिंदु

  • FTO रैंकिंग के बारे में:
    • इसे नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा विकसित किया गया है।
    • इसका उद्देश्य पायलट प्रशिक्षण में पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही में सुधार करना है।
  • प्रमुख परिणाम (अप्रैल 2026):
    • एक FTO ने कैटेगरी A’ हासिल की (पिछले चरण में किसी को नहीं मिली थी)।
    • कैटेगरी ‘B’ संस्थानों की संख्या में वृद्धि हुई।
    • कैटेगरी ‘C’ के FTOs की संख्या में कमी आई।
  • संस्थानों का प्रदर्शन:
    • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी ने उल्लेखनीय सुधार प्रदर्शित किया।
    • परिचालन दक्षता और प्रशिक्षण मानकों में समग्र वृद्धि देखी गई।
  • प्रशिक्षण पारिस्थितिक तंत्र पर प्रभाव:
    • प्रशिक्षण उड़ान घंटों (Flying hours) में 32% से 50% तक की वृद्धि हुई।
    • FTOs के विमान बेड़े (Fleet) का विस्तार हुआ।
    • कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) की आवश्यकताओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है।
  • करियर के अवसर:
    • अगले दशक में लगभग30,000 अतिरिक्त पायलटों की आवश्यकता का अनुमान है।
    • नए हवाई अड्डों और विमानों के साथ विमानन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है।
  • विकास के संकेतक:
    • पिछले 8 वर्षों में कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) जारी करने की दर में 2.5 गुना की वृद्धि हुई।
    • 6 नए FTOs को मंजूरी दी गई; 6 और प्रक्रिया में हैं।
  • सरकार का दृष्टिकोण:
    • ट्रेन इन इंडिया, फ्लाई इन इंडिया (भारत में प्रशिक्षण लें, भारत में उड़ान भरें) पहल।
    • भारतीय FTOs को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना।