DRDO और नौसेना ने किया NASM-SR मिसाइल का पहला सफल परीक्षण

  • 30 Apr 2026

29 अप्रैल, 2026 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय नौसेना ने बंगाल की खाड़ी में ओडिशा तट के पास एक नौसैनिक हेलीकॉप्टर से स्वदेश निर्मित 'नेवल एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज' (NASM-SR) का पहला साल्वो प्रक्षेपण (Salvo launch) सफलतापूर्वक किया।

मुख्य बिंदु

  • सैल्वो लॉन्च: परीक्षण के दौरान, एक ही हेलीकॉप्टर से दो मिसाइलें त्वरित अंतराल में दागी गईं, जिससे यह उन्नत वायु- प्रक्षेपित जहाज-रोधी मिसाइल (एंटी-शिप मिसाइल) प्रणाली का पहला सैल्वो लॉन्च बन गया।
  • मिशन की सफलता: परीक्षण के सभी उद्देश्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिए गए। इस दौरान रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम और टेलीमेट्री के माध्यम से मिसाइल के प्रदर्शन को ट्रैक किया गया।
  • वाटरलाइन हिट क्षमता: मिसाइल ने वाटरलाइन (जलस्तर) पर सटीक प्रहार करने की क्षमता का प्रदर्शन किया, जो दुश्मन के युद्धपोतों के खिलाफ अधिकतम विनाशकारी प्रभाव पैदा करने में सक्षम है।
  • उन्नत स्वदेशी तकनीक: NASM-SR एक सॉलिड प्रोपल्शन बूस्टर, लॉन्ग-बर्न सस्टेनर, उन्नत सीकर (Seeker), इंटीग्रेटेड एवियोनिक्स, फाइबर-ऑप्टिक जायरोस्कोप-आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, रेडियो अल्टीमीटर और हाई-बैंडविड्थ टू-वे डेटा लिंक से लैस है।
  • सटीक मार्गदर्शन: बेहतर लक्ष्य सटीकता और परिचालन लचीलेपन के लिए यह प्रणाली उन्नत नियंत्रण एल्गोरिदम और जेट-वेन कंट्रोल (Jet-vane control) तकनीक का उपयोग करती है।
  • DRDO का सहयोग: इस मिसाइल को रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद द्वारा निम्नलिखित संस्थानों के सहयोग से विकसित किया गया है:
    • हैदराबाद स्थित ‘डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी’ (DRDL),
    • पुणे स्थित हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL),
    • चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) तथा
    • ITR चांदीपुर।
  • उद्योग की भागीदारी: इसके उत्पादन में भारतीय उद्योग भागीदार और स्टार्ट-अप शामिल हैं, जो स्वदेशी रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करते हैं।
  • सामरिक महत्व: यह सफल प्रक्षेपण भारत की नौसैनिक विमानन प्रहार क्षमता को काफी बढ़ाता है और समुद्री निवारक क्षमताओं (Maritime Deterrence) को मजबूत करता है।