SC ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वैध ठहराया
- 28 May 2026
27 मई, 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की वैधता को बरकरार रखते हुए कहा कि यह स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में सहायक है।
मुख्य बिंदु
- संवैधानिक आधार: न्यायालय ने कहा कि निर्वाचन आयोग को यह शक्ति संविधान के अनुच्छेद 324, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और संबंधित नियमों से प्राप्त होती है।
- मामले की पृष्ठभूमि: याचिकाओं में बिहार में SIR आयोजित करने के लिए जून 2025 में जारी निर्वाचन आयोग की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी।
- SIR का कारण: अदालत ने आयोग के इस तर्क को स्वीकार किया कि बड़े पैमाने पर पलायन (Migration), शहरीकरण, नामों के जुड़ने और हटने के कारण मतदाता सूची में अशुद्धियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
- स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव: न्यायालय ने टिप्पणी की कि सटीक और विश्वसनीय मतदाता सूची ही लोकतांत्रिक चुनावों की आधारशिला होती है।
- वैधानिक अधिकार: फैसले में कहा गया कि कानून के तहत जब भी आवश्यकता हो, SIR आयोजित किया जा सकता है।
- नागरिकता संबंधी तर्क खारिज: न्यायालय ने उन दावों को अस्वीकार कर दिया, जिनमें कहा गया था कि SIR मौजूदा मतदाताओं की नागरिकता संबंधी अनुमानित मान्यता को कमजोर करता है।
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