SC ने 'ट्रॉमा केयर' को मौलिक अधिकार के रूप में दी मान्यता
- 29 May 2026
26 मई, 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि ट्रॉमा एवं आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच, अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। साथ ही न्यायालय ने सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को भारत की ट्रॉमा-केयर तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को सुदृढ़ करने का निर्देश दिया।
मुख्य बिंदु
- संबंधित मामला: यह फैसला सेव-लाइफ फाउंडेशन एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले में सुनाया गया।
- व्यापक कवरेज: ये निर्देश सभी प्रकार के ट्रॉमा पर लागू होते हैं, जिनमें सड़क दुर्घटनाएं, जलना (burns), ऊंचाई से गिरना, डूबना, औद्योगिक दुर्घटनाएं, आग, विस्फोट और आपदा से जुड़ी चोटें शामिल हैं।
- एकीकृत आपातकालीन नंबर: न्यायालय ने 100, 101, 102, 108, 1033 और 1091 जैसे आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों को तीन महीने के भीतर एकल राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर '112' में एकीकृत करने का निर्देश दिया।
- एम्बुलेंस सुधार: सभी सार्वजनिक और निजी एम्बुलेंसों को 'नेशनल एम्बुलेंस कोड' का पालन करना होगा और उन्हें GPS-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम से लैस किया जाना अनिवार्य है।
- गुड सेमेटेरियन (Good Samaritan) संरक्षण: दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने वाले नागरिकों की सुरक्षा के लिए राज्यों को भौतिक और डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करनी होगी।
- ट्रॉमा रजिस्ट्री: बेहतर योजना और निगरानी के लिए अदालत ने राष्ट्रीय ट्रॉमा डेटाबेस से जुड़ी राज्य-स्तरीय 'ट्रॉमा रजिस्ट्रियों' के निर्माण का आदेश दिया।
- अस्पताल वर्गीकरण: राज्यों को राजमार्गों, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी ट्रॉमा-केयर क्षमताओं के आधार पर सार्वजनिक और निजी अस्पतालों को वर्गीकृत और नामित करना होगा।
सामयिक खबरें
सामयिक खबरें
सामयिक खबरें
राष्ट्रीय
- राजनीति और प्रशासन
- अवसंरचना
- आंतरिक सुरक्षा
- आदिवासियों से संबंधित मुद्दे
- कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ
- कार्यकारी और न्यायपालिका
- कार्यक्रम और योजनाएँ
- कृषि
- गरीबी और भूख
- जैवविविधता संरक्षण
- पर्यावरण
- पर्यावरण प्रदूषण, गिरावट और जलवायु परिवर्तन
- पारदर्शिता और जवाबदेही
- बैंकिंग व वित्त
- भारत को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह
- भारतीय अर्थव्यवस्था
- रक्षा और सुरक्षा
- राजव्यवस्था और शासन
- राजव्यवस्था और शासन
- रैंकिंग, रिपोर्ट, सर्वेक्षण और सूचकांक
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी
- शिक्षा
- सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप
- सांविधिक, विनियामक और अर्ध-न्यायिक निकाय
- स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दे


