मानव तस्करी के पीड़ितों की सुरक्षा हेतु SC के दिशा-निर्देश

  • 30 May 2026

29 मई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं और युवा लड़कियों को व्यावसायिक यौन शोषण (CSE) के लिए होने वाली मानव तस्करी से बचाने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए।

मुख्य बिंदु

  • मामले की पृष्ठभूमि: वेश्यावृत्ति में धकेली जाने वाली युवा लड़कियों के लिए कानूनों और सुरक्षात्मक तंत्र की कमी को उजागर करने वाली यह याचिका, वर्ष 2004 में गैर-सरकारी संगठन (NGO) 'प्रज्वला' (Prajwala) द्वारा दायर की गई थी।
  • पीड़ित सुरक्षा प्रोटोकॉल: मानव तस्करी को संवैधानिक गरिमा पर एक आघात बताते हुए, अदालत ने व्यावसायिक यौन शोषण (CSE) से बची महिलाओं/लड़कियों के लिए एक समान 'पीड़ित सुरक्षा प्रोटोकॉल' स्थापित करने के विस्तृत निर्देश दिए।
  • पीड़ित सुरक्षा योजना: इस योजना के दायरे में रेस्क्यू ऑपरेशन (बचाव अभियान), पीड़ितों की पहचान, पुनर्वास, कानूनी अभियोजन तंत्रऔर विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय शामिल होगा।
  • संस्थागत समन्वय: सर्वोच्च न्यायालय ने जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट और पॉक्सो (POCSO) एक्ट को मानव तस्करी विरोधी व्यवस्था के साथ एकीकृत किया। इसके साथ ही बाल कल्याण समितियों (CWCs), मानव तस्करी विरोधी इकाइयों (AHTUs), वन स्टॉप सेंटर्स (OSCs), कानूनी सहायता प्राधिकरणों और राज्य सुरक्षा निकायों के बीच बेहतर समन्वय का आह्वान किया