NSFDC की रियायती ऋण योजनाओं से आजीविका में सुधार: अध्ययन
- 15 Jul 2026
13 जुलाई, 2026 को जारी एक अध्ययन में पाया गया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (NSFDC) की रियायती ऋण योजनाओं से अनुसूचित जाति के लाभार्थियों में उद्यमिता, स्वरोजगार और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
मुख्य बिंदु
- टिकाऊ परिसंपत्तियां: लगभग 93.54% लाभार्थियों के पास NSFDC की वित्तीय सहायता से निर्मित परिसंपत्तियां अब भी मौजूद हैं।
- आय में वृद्धि: सालाना ₹1.5 लाख से ₹3 लाख कमाने वाले लाभार्थियों की हिस्सेदारी 32.61% से बढ़कर 46.28% हो गई, जबकि निम्न आय वाले परिवारों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई।
- स्वरोजगार में वृद्धि: लाभार्थियों में स्वरोजगार की हिस्सेदारी 46.62% से बढ़कर 73.95% हो गई, जिसमें गैर-कृषि गतिविधियों का प्रमुख योगदान रहा।
- महिला सशक्तीकरण: ऋण सहायता प्राप्त करने वाली लगभग 95.6% गृहिणियां स्वरोजगार से जुड़ गईं।
- सामाजिक प्रभाव:81% से अधिक लाभार्थियों ने बताया कि ऋण आधारित योजनाओं से उनकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।
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