यूनेस्को के क्षेत्रीय रजिस्टर में तीन भारतीय ग्रंथ

  • 06 Nov 2026

5 नवंबर, 2026 को भारत ने घोषणा की कि ‘राजतरंगिणी’, ‘महाभारत’ और ‘अर्थशास्त्र’ की पांडुलिपि विरासत यूनेस्को के विश्व स्मृति एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय रजिस्टर में शामिल हुई है।

मुख्य तथ्य

  • निर्णय का स्थान: इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित विश्व स्मृति एशिया-प्रशांत समिति (MOWCAP) के 11वें सत्र में तीनों भारतीय प्रविष्टियों को स्वीकृति मिली।
  • भारत की उपलब्धि: तीन नई प्रविष्टियों के बाद यूनेस्को के विश्व स्मृति एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय रजिस्टर में भारत की कुल प्रविष्टियाँ छह हो गई हैं।
  • राजतरंगिणी: 12वीं शताब्दी में कल्हण द्वारा संस्कृत में रचित ‘राजतरंगिणी’ कश्मीर के शासकों, राजवंशों और ऐतिहासिक घटनाओं का क्रमबद्ध विवरण प्रस्तुत करती है।
  • महाभारत: परंपरागत रूप से वेदव्यास से संबद्ध ‘महाभारत’ में धर्म, न्याय, कर्तव्य, सत्ता, मानवीय संबंधों और नैतिक मूल्यों का व्यापक विवेचन मिलता है।
  • अर्थशास्त्र: कौटिल्य (चाणक्य) से संबद्ध ‘अर्थशास्त्र’ में प्राचीन भारतीय शासन, प्रशासन, अर्थनीति, कूटनीति और सैन्य रणनीति का व्यवस्थित वर्णन है।
  • IGNCA की भूमिका: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) ने तीनों प्रविष्टियों के नामांकन दस्तावेज तैयार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने उपलब्धि की जानकारी दी।
  • पूर्ववर्ती भारतीय प्रविष्टियाँ: वर्ष 2024 में ‘रामचरितमानस’, ‘पंचतंत्र’ और ‘सहृदयालोक-लोचन’ को इसी क्षेत्रीय रजिस्टर में शामिल किया गया था।