वास्तविक हिरासत से गिने जाएँगे गिरफ्तारी के 24 घंटे

  • 06 Nov 2026

5 नवंबर, 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने सुजीत दास बनाम भारत संघ मामले में स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी की 24 घंटे की सीमा वास्तविक हिरासत से शुरू होगी।

मुख्य तथ्य

  • संवैधानिक प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 22(2) के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
  • समय-सीमा की गणना: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 24 घंटे की अवधि वास्तविक हिरासत शुरू होने से गिनी जाएगी, न कि औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज होने से।
  • न्यायिक पीठ: न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता की संवैधानिक सुरक्षा पर निर्णय दिया।
  • यात्रा समय की छूट: निर्धारित 24 घंटे की गणना से केवल गिरफ्तारी स्थल से मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक पहुँचने में आवश्यक यात्रा समय को बाहर रखा जाएगा।
  • मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी: मजिस्ट्रेट को वास्तविक हिरासत की तारीख और समय दर्ज करके संवैधानिक समय-सीमा के अनुपालन की जाँच करनी होगी।
  • अनुचित हिरासत: मजिस्ट्रेट 24 घंटे के भीतर पेशी होने पर भी परिस्थितियों के अनुसार हिरासत की अवधि अनुचित पाए जाने पर रिमांड अस्वीकार कर सकता है।
  • पूर्व निर्णयों से असहमति: सर्वोच्च न्यायालय ने ओडिशा, मद्रास और केरल उच्च न्यायालयों के उन निर्णयों को अस्वीकार किया, जिनमें औपचारिक गिरफ्तारी से पहले की हिरासत को गणना से बाहर रखा गया था।
  • मामले की पृष्ठभूमि: त्रिपुरा में NDPS अधिनियम से जुड़े मामले में आरोपियों को 29 सितंबर, 2025 को हिरासत में लिया गया, जबकि औपचारिक गिरफ्तारी अगले दिन दर्ज हुई।