ज्वारीय ऊर्जा

दिसंबर 2014 में 'क्रिसिल रिस्क एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस लिमिटेड' (CRISIL Risk and Infrastructure Solutions Limited) के सहयोग से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नई द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, देश की ज्वारीय विद्युत क्षमता लगभग 12,455 मेगावाट अनुमानित है।

  • देश में ज्वारीय विद्युत शक्ति का दोहन करने के पूर्व प्रयास प्रति मेगावाट 30 करोड़ रुपए से 60 करोड़ रुपए की उच्च पूंजीगत लागत के कारण विफल रहे।
  • फ्रांस में स्थित 240 मेगावाट की ला रेंस स्टेशन (1966 में स्थापित) और दक्षिण कोरिया में स्थित 254 मेगावाट की सिहवा संयंत्र (2011 में स्थापित) नामक दो ज्वारीय ऊर्जा परियोजनाओं का विश्व में ज्वारीय ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता में 90% से अधिक का योगदान है।
  • वर्तमान में, बहुत अधिक पूंजीगत लागत के कारण, भारत सरकार ने ज्वारीय ऊर्जा के उत्पादन के लिए कोई नीति या कार्यक्रम लागू नहीं किया है।

Source : सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल ऑनलाइन, दिसंबर, 2021