अरावली पारिस्थितिकी पर सरकार का स्पष्टीकरण
- 22 Dec 2025
21 दिसंबर, 2025 को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कहा कि अरावली की पारिस्थितिकी को कोई तत्काल खतरा नहीं है तथा सतत वनीकरण, पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) अधिसूचनाओं और खनन एवं शहरी गतिविधियों की सख्त निगरानी यह सुनिश्चित करती है कि अरावली राष्ट्र के लिए प्राकृतिक विरासत और पारिस्थितिक ढाल बनी रहे।
मुख्य तथ्य:
- मंत्री का स्पष्टीकरण: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने प्रेस वार्ता में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के 100 मीटर नियम की गलत व्याख्या की जा रही है; उन्होंने नागरिकों से अरावली संबंधी गलत सूचना फैलाना बंद करने की अपील की।
- खनन की अनुमति : अरावली का कुल क्षेत्रफल 1,47,000 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें केवल 0.19% क्षेत्र में खनन की अनुमति है।
- संरक्षित क्षेत्र: सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार अरावली क्षेत्र का 90% संरक्षित क्षेत्र में आता है और इस संबंध में कोई छूट नहीं है।
- भौगोलिक विस्तार: अरावली पर्वतमाला दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात सहित चार राज्यों में फैली हैऔरदिल्ली की अरावली पहाड़ियों में खनन की अनुमति नहीं है।
- सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय: हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण मंत्रालय की समिति द्वारा अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा पर दी गई सिफारिशों को स्वीकार किया, जिसमें उल्लेख है कि 100 मीटर से कम ऊँची पहाड़ियों को अब प्राचीन पहाड़ियों के हिस्से के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी।
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