पिपरहवा अवशेष प्रदर्शनी
- 02 Jan 2026
3 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध से संबंधित पवित्र पिपरहवा अवशेषों की अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे।
मुख्य तथ्य:
- प्रदर्शनी का महत्व: “लोटस लाइट: रेलिक्स ऑफ़ अवेकंड वन " ("Lotus Light: Relics of the Awakened One") शीर्षक वाली प्रदर्शनी में एक शताब्दी से अधिक समय बाद प्रत्यावर्तित पिपरहवा अवशेषों को राष्ट्रीय संग्रहालय (नई दिल्ली) और भारतीय संग्रहालय (कोलकाता) के संग्रहों के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।
- अवशेषों का महत्व: 1898 में ब्रिटिश इंजीनियर विलियम क्लैक्सटन पेप्पे द्वारा खोजे गए ये अवशेष प्रारंभिक बौद्ध धर्म के अध्ययन में केंद्रीय स्थान रखते हैं और गौतम बुद्ध के नश्वर अवशेषों से जुड़े माने जाते हैं।
- पुरातात्विक साक्ष्य: पिपरहवा स्थल को प्राचीन कपिलवस्तु से जोड़ा गया है; ब्राह्मी शिलालेख इन्हें शाक्य कुल द्वारा संरक्षित बताता है।
- खोज का इतिहास: इसकी खोज 1898 में ब्रिटिश सिविल इंजीनियर विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने उत्तर प्रदेश के पिपरहवा में की थी। खुदाई में पत्थर के ताबूत से पाँच फूलदान मिले जिनमें हड्डी के टुकड़े, आभूषण और लगभग 1,800 रत्न व अर्ध-कीमती पत्थर थे।
- प्रत्यावर्तन: जुलाई 2025 में हांगकांगसे संस्कृति मंत्रालय ने गोदरेज इंडस्ट्रीज ग्रुप के सहयोग से इन अवशेषों की ऐतिहासिक वापसी सुनिश्चित की।
- बुद्ध के अवशेष : बौद्ध परंपरा में बुद्ध के महापरिनिर्वाण (483 BCE) के बाद उनके दाह संस्कार अवशेषों को आठ भागों में विभाजित कर विभिन्न गणराज्यों को दिया गया, जिन्होंने स्तूप निर्मित किए। सम्राट अशोक ने इन्हें 84,000 भागों में पुनर्वितरित कर पूरे उपमहाद्वीप में स्तूप बनवाए। पिपरहवा अवशेषों का ब्राह्मी शिलालेख इन्हें बुद्ध के शाक्य कुल से जोड़ता है, जिससे यह खोज भारत में सबसे प्रामाणिक अवशेषों में गिनी जाती है।
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