EPFO वेतन सीमा पुनरीक्षण
- 06 Jan 2026
5 जनवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की वेतन सीमा के समयबद्ध पुनरीक्षण से जुड़े मामले में याचिकाकर्ता को केंद्र सरकार के समक्ष प्रतिनिधित्व देने की अनुमति दी।
प्रमुख तथ्य :
- पीठ और पक्षकार: न्यायमूर्ति जे. के. महेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया; याचिकाकर्ता नवीन प्रकाश नौटियाल एक अकादमिक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिनकी ओर से अधिवक्ता प्रणव सचदेवा और नेहा राठी उपस्थित हुए।
- वेतन सीमा पर आपत्ति: वर्तमान सीमा 15,000 रुपये प्रति माह है, जबकि केंद्र व राज्यों की न्यूनतम मजदूरी इससे अधिक है; बड़ी संख्या में श्रमिक EPFO सुरक्षा से वंचित हैं।
- असंगत पुनरीक्षण: सीमा का पुनरीक्षण 13–14 वर्ष के अंतराल पर हुआ है, बिना महंगाई, न्यूनतम मजदूरी या CPI जैसे संकेतकों से लिंक के।
- कवरेज पर प्रभाव: इस अनियमितता से संगठित क्षेत्र के बड़े हिस्से को सामाजिक सुरक्षा से बाहर रखा जा रहा है।
- समिति की सिफारिशें: लोक लेखा समिति और EPFO उप-समिति ने 2022 में नियमित पुनरीक्षण की सिफारिश की थी; जुलाई 2022 में केंद्रीय बोर्ड द्वारा अनुमोदन के बावजूद केंद्र ने कार्रवाई नहीं की।
- EPFO वेतन सीमा (Wage Ceiling): EPFO के अंतर्गत अनिवार्य कवरेज उन कर्मचारियों तक सीमित होता है जिनका मासिक वेतन निर्धारित सीमा से कम या बराबर हो। लंबे समय तक सीमा अद्यतन न होने पर महंगाई और मजदूरी वृद्धि से अधिक कर्मचारी कवरेज से बाहर हो जाते हैं।
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