55 दुर्लभ साहित्यिक कृतियों का विमोचन

  • 07 Jan 2026

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 6 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के कौशल भवन में भारत की शास्त्रीय भाषाओं पर आधारित 55 दुर्लभ और मूल्यवान साहित्यिक कृतियों का विमोचन किया।

मुख्य तथ्य :

  • विभाजन: इन 55 कृतियों में भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) के उत्कृष्टता केंद्रों द्वारा विकसित 41 विद्वत ग्रंथ और केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान (CICT) द्वारा प्रकाशित 13 पुस्तकें शामिल हैं।
  • शामिल भाषाएं: ये कृतियाँ कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, ओड़िया और तमिल जैसी पांच शास्त्रीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।
  • इनमें तमिल ग्रंथों के विभिन्न भाषाओं में अनुवाद और शोध ग्रंथ शामिल हैं:
    • तिरुक्कुरल (Tirukkural): यह प्रसिद्ध तमिल ग्रंथ कवि तिरुवल्लुवर द्वारा रचित है। विमोचन में इसका भारतीय सांकेतिक भाषा (Sign Language) में 45 कड़ियों वाला भावार्थ संस्करण जारी किया गया।
    • शिलप्पादिकारम (Silappathikaram): प्रसिद्ध तमिल महाकाव्य का तेलुगु अनुवाद।
    • संगम कालीन कृतियों का मलयालम अनुवाद: इसमें पुरानानूरु, पतिट्रुपत्तु, और पट्टुपट्टु जैसी रचनाएं शामिल हैं।
    • अन्य तमिल अनुवाद: नन्मणिक्कटिकई, नारपतु, और मुत्तोलयिरम के मलयालम अनुवाद।
  • उद्देश्य: इस पहल का उद्देश्य भारत की भाषाई विरासत को शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक गौरव के केंद्र में स्थापित करना और शास्त्रीय ज्ञान को नई पीढ़ी के लिए सुलभ बनाना है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: मंत्री ने जोर दिया कि मातृभाषा और भारतीय भाषाओं में शिक्षा प्रदान करना NEP 2020 की प्रमुख परिकल्पना है।