भारतीय कार्बन बाज़ार के अनुपालन दायरे का विस्तार
- 23 Jan 2026
जनवरी 2026 में भारत सरकार ने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) के तहत अतिरिक्त कार्बन-गहन क्षेत्रों के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता (GEI) लक्ष्य अधिसूचित किए।
मुख्य बिंदु
- नए क्षेत्र शामिल: इस अधिसूचना के माध्यम से पेट्रोलियम रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल्स, वस्त्र और द्वितीयक एल्युमिनियम क्षेत्रों को भारतीय कार्बन बाज़ार (ICM) के अनुपालन तंत्र के अंतर्गत लाया गया है।
- अनुपालन का विस्तार: इन क्षेत्रों की कुल 208 नामित इकाइयों को अब निर्धारित उत्सर्जन तीव्रता न्यूनीकरण लक्ष्यों को पूरा करना होगा।
- कुल नामित इकाइयाँ: नए समावेशन के बाद देश के सबसे अधिक उत्सर्जन वाले क्षेत्रों की 490 इकाइयों पर GEI न्यूनीकरण लक्ष्य लागू होंगे।
- पूर्व कवरेज: अक्टूबर 2025 में एल्युमिनियम, सीमेंट, क्लोर-एल्कली तथा पल्प एवं पेपर क्षेत्रों के लिए GEI लक्ष्य अधिसूचित किए गए थे, जिनमें 282 इकाइयाँ शामिल थीं।
- CCTS: वर्ष 2023 में अधिसूचित कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS), भारतीय कार्बन बाज़ार के लिए परिचालन ढांचा प्रदान करती है।
- बाज़ार तंत्र: CCTS दो घटकों के माध्यम से कार्य करता है:
- अनुपालन तंत्र (Compliance Mechanism): निर्दिष्ट उद्योगों को निर्धारित GEI लक्ष्य पूरे करने होते हैं।
- ऑफसेट तंत्र (Offset Mechanism): लक्ष्य से अधिक प्रदर्शन करने वाली संस्थाएं कार्बन क्रेडिट सर्टिफिकेट प्राप्त करती हैं, जिनका, अनुपालन नहीं करने वाली संस्थाओं के साथ व्यापार किया जा सकता है।
- बेहतर प्रदर्शन का प्रोत्साहन: निर्धारित लक्ष्यों से अधिक कमी हासिल करने वाले उद्योगों को व्यापार योग्य क्रेडिट मिलते हैं, जिससे गहन डीकार्बोनाइज़ेशन को वित्तीय प्रोत्साहन प्राप्त होता है।
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