लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर्स (LSDs): पहला राष्ट्रीय बायोबैंक

  • 13 Feb 2026

फरवरी 2026 में भारत के 28 चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थानों के शोधकर्ताओं ने ‘लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर्स’ (LSDs) पर केंद्रित भारत का पहला सरकार समर्थित राष्ट्रीय बायोबैंक तैयार किया, जिसका उद्देश्य अनुसंधान, स्क्रीनिंग और उपचार विकास को प्रोत्साहित करना है।

मुख्य बिंदु

  • पहली राष्ट्रीय बायोबैंक पहल: इस बायोबैंक में 15 राज्यों के 530 रोगियों से प्राप्त जैविक नमूने तथा विस्तृत नैदानिक, जैव-रासायनिक और आनुवंशिक आंकड़े संकलित किए गए हैं, जिससे दुर्लभ आनुवंशिक रोगों पर अनुसंधान हेतु एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस निर्मित हुआ है।
  • लाइसोज़ोमल स्टोरेज डिसऑर्डर्स: LSDs 70 से अधिक दुर्लभ वंशानुगत उपापचयी रोगों का समूह है, जो विशिष्ट एंजाइमों की अनुपस्थिति के कारण शरीर की कोशिकाओं में विषैले पदार्थों के संचय तथा गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं को जन्म देते हैं।
  • गंभीर उपचार अंतराल: केवल 7% दुर्लभ रोगों के लिए ही उपचार उपलब्ध है, और LSD के मौजूदा उपचार प्रति रोगी प्रतिवर्ष ₹1 करोड़ से अधिक महंगे हो सकते हैं, जिससे अधिकांश परिवारों के लिए वे सुलभ नहीं हैं।
  • भारत में रोग-भार अधिक: देश में अनुमानतः 12,000 से अधिक रोगी LSDs से प्रभावित हैं।
  • शोध व स्क्रीनिंग हेतु डेटा: बायोबैंक में रक्त, प्लाज़्मा और मूत्र से प्राप्त जीनोमिक DNA नमूने, एंज़ाइम गतिविधि और आनुवंशिक जानकारी शामिल है, जो बेहतर निदान उपकरण और प्रारंभिक स्क्रीनिंग तकनीक विकसित करने में वैज्ञानिकों की सहायता करेगा।