आक्रामक विदेशी प्रजातियों पर NBA की विशेषज्ञ समिति

  • 23 Mar 2026

21 मार्च, 2026 को, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों का पालन करते हुए, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने भारत की जैव-विविधता पर ‘आक्रामक विदेशी प्रजातियों’ के प्रभाव का आकलन करने के लिए एक बहु-विषयक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।

मुख्य बिंदु

  • पृष्ठभूमि: NGT ने स्वत: संज्ञान लेते हुए आक्रामक प्रजातियों द्वारा उत्पन्न पारिस्थितिक असंतुलन को रेखांकित किया था और व्यापक राष्ट्रीय मूल्यांकन के निर्देश दिए थे।
  • आक्रामक विदेशी प्रजातियां क्या हैं?: ऐसी प्रजातियां (पौधे, जानवर या सूक्ष्मजीव) जिन्हें उनके प्राकृतिक आवास से बाहर लाया गया हो और जो तेजी से फैलकर स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र, जैव-विविधता और मानव कल्याण को नुकसान पहुंचाती हों।
  • वैश्विक प्रभाव: दुनिया भर में होने वाले प्रजातियों के विलुप्त होने (Extinction) के मामलों में लगभग 60% योगदान इन्हीं आक्रामक प्रजातियों का है।
  • भारत का परिदृश्य: लैंटाना कैमारा, प्रोसोपिस जूलिफ्लोरा (विलायती बबूल) और जलकुंभी जैसी प्रजातियों ने भारत के लगभग 60% प्राकृतिक आवासों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
  • समिति का अधिदेश (Mandate):
    • आक्रामक विदेशी प्रजातियों की एक राष्ट्रीय सूची तैयार करना।
    • उच्च जोखिम वाली प्रजातियों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता देना।
    • इनके नियंत्रण, रोकथाम और उन्मूलन (Eradication) के लिए रणनीतियों की सिफारिश करना।
    • पारिस्थितिक बहाली (Restoration) के उपाय और राष्ट्रीय दिशा-निर्देश सुझाना।
  • समिति की संरचना और कानूनी आधार:
    • अध्यक्षता: इसकी अध्यक्षता धनंजय मोहन करेंगे, जबकि ए. बीजू कुमार इसके सह-अध्यक्ष होंगे।
    • भागीदारी: इसमें भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI), भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और प्रकृति संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ (IUCN) जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं।
    • कानूनी आधार: इस समिति का गठन जैव विविधता अधिनियम, 2002 (संशोधित 2023) के तहत किया गया है।
    • कार्यकाल: यह समिति 2 वर्ष की अवधि के लिए कार्य करेगी।
  • महत्व: यह पहल भारत की जैव-विविधता की रक्षा करने, पारिस्थितिक तंत्र की लोचशीलता को बढ़ाने और भारत की राष्ट्रीय व वैश्विक जैव-विविधता प्रतिबद्धताओं (जैसे कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क) को पूरा करने में सहायक सिद्ध होगी।