MSME के लिए पारस्परिक ऋण गारंटी योजना में संशोधन
- 23 Mar 2026
22 मार्च, 2026 को वित्त मंत्रालय ने विनिर्माताओं और निर्यातकों के लिए ऋण तक पहुंच आसान बनाने हेतु “सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए पारस्परिक ऋण गारंटी योजना” (MCGS-MSME) में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की।
मुख्य बिंदु
- व्यापक दायरा: अब इस योजना में सेवा क्षेत्र को भी शामिल कर लिया गया है, जिससे इसका लाभ विनिर्माण इकाइयों के साथ-साथ सेवा प्रदाताओं को भी मिलेगा।
- योगदान: MSMEs अब अपने 5% के अग्रिम योगदान का भुगतान चौथे वर्ष के बाद किस्तों (Tranches) में कर सकते हैं, जिससे उन पर शुरुआती वित्तीय बोझ कम होगा।
- परियोजना लागत के नियमों में बदलाव: योजना के तहत पात्र उपकरण/मशीनरी की लागत का हिस्सा परियोजना लागत के 75% से घटाकर 60% कर दिया गया है।
- क्रियान्वयन: संशोधित योजना को ‘नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड’ (NCGTC) द्वारा 24 फरवरी, 2026 से प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है।
- ऋण एवं गारंटी का विवरण:
- अधिकतम गारंटीकृत ऋण: ₹20 करोड़।
- गारंटी कवरेज: डिफॉल्ट राशि का 75%।
- गारंटी की अवधि: 10 वर्ष।
- अग्रिम योगदान: ऋण राशि का 2% (अधिकतम ₹40 लाख)। इसमें से 1% चौथे वर्ष में और शेष 1% पांचवें वर्ष में वापस कर दिया जाएगा।
- शुल्क संरचना: पहले वर्ष में कोई गारंटी शुल्क नहीं; उसके बाद बकाया ऋण पर वार्षिक 0.5% शुल्क।
- पात्रता मानदंड: ऐसे लाभदायक MSME, जिनका पिछले 3 वर्षों में प्रत्येक वर्ष कम से कम 25% निर्यात टर्नओवर रहा हो और जो निर्यात प्राप्ति के नियमों को पूरा करते हों।
- महत्व: भारत की GDP में MSMEs का योगदान ~30%, निर्यात में 45% से अधिक है, और यह क्षेत्र 35 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
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