नासा द्वारा आर्टेमिस में बदलाव की घोषणा
- 25 Mar 2026
24 मार्च, 2026 को नासा ने अपने आर्टेमिस कार्यक्रम में बड़े बदलावों की घोषणा की। इसके तहत चंद्रमा की कक्षा में बनने वाले अंतरिक्ष स्टेशन (लूनर गेटवे) की योजना को रद्द कर दिया गया है। अब पूरा ध्यान चंद्रमा की सतह पर एक स्थायी बेस बनाने और मंगल के लिए परमाणु-संचालित मिशन पर केंद्रित होगा।
मुख्य बिंदु
- चंद्र रणनीति में परिवर्तन: नासा अब ‘लूनर गेटवे’ प्रोजेक्ट के संसाधनों का उपयोग चंद्रमा की सतह पर 20 बिलियन डॉलर की लागत से एक स्थायी बेस बनाने के लिए करेगा।
- उद्देश्य: दीर्घकालिक चंद्र अन्वेषण को मजबूत करना और चीन के 2030 के नियोजित मिशन से पहले अमेरिका की चंद्रमा पर पुनः लैंडिंग सुनिश्चित करना।
- चंद्र बेस (Moon Base) योजना:
- रोबोटिक लैंडर्स और ड्रोन की तैनाती।
- सतह पर बुनियादी ढांचे का विकास।
- चंद्रमा पर परमाणु ऊर्जा के उपयोग की संभावनाओं की खोज।
- परमाणु-संचालित मंगल मिशन:
- स्पेस रिएक्टर-1 (SR-1) फ्रीडम: 2028 से पहले इस अंतरिक्ष यान की योजना है।
- यह “परमाणु विद्युत प्रणोदन तकनीक” का प्रदर्शन करेगा।
- इसमें मंगल ग्रह के अन्वेषण के लिए हेलीकॉप्टरों की तैनाती भी शामिल है।
- आर्टेमिस कार्यक्रम अपडेट: अंतरिक्ष यात्रियों की लैंडिंग का लक्ष्य अब 2028 रखा गया है।
- अंतरराष्ट्रीय भागीदारों पर प्रभाव: इन बदलावों ने जापान, कनाडा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) जैसे भागीदारों के लिए अनिश्चितता पैदा कर दी है, जो ‘लूनर गेटवे’ में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे थे।
- पृष्ठभूमि:
- आर्टेमिस कार्यक्रम: 2017 में लॉन्च किया गया।
- इसका उद्देश्य “अपोलो कार्यक्रम” (जो 1972 में समाप्त हुआ था) के बाद चंद्रमा पर निरंतर मानव उपस्थिति और मिशन स्थापित करना है।
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