स्टील्थ फ्रिगेट ‘दूनागिरी’ भारतीय नौसेना को सौंपा गया
- 01 Apr 2026
30 मार्च, 2026 को स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘दूनागिरी’ (Dunagiri) को भारतीय नौसेना को सौंपा गया। यह कोलकाता में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा ‘प्रोजेक्ट 17A’ के तहत निर्मित एक स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट है।
मुख्य बिंदु
- परियोजना का विवरण:
- यह प्रोजेक्ट 17A (नीलगिरी-श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट) का हिस्सा है।
- यह इस श्रृंखला का पांचवां जहाज और GRSE द्वारा निर्मित दूसरा जहाज है।
- डिज़ाइन और विकास:
- इसका डिज़ाइन भारतीय नौसेना के वारशिप डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया है।
- इसका निर्माण ‘इंटीग्रेटेड मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन’ पद्धति का उपयोग करके किया गया है।
- इसे पिछली शिवालिक-श्रेणी के फ्रिगेट्स की तुलना में अपग्रेड किया गया है।
- नामकरण का महत्व:
- इसका नाम पूर्ववर्ती INS दूनागिरी (1977-2010) के नाम पर रखा गया है।
- यह नौसेना की गौरवशाली विरासत को जारी रखता है।
- उन्नत क्षमताएं:
- इसमें स्टील्थ (रडार से बचने की क्षमता), बेहतर उत्तरजीविता और स्वचालन की विशेषताएं हैं।
- यह हवाई, सतही और उप-सतह (पानी के भीतर) युद्ध सहित बहु-मिशन भूमिका निभाने में सक्षम है।
- हथियार और सेंसर प्रणालियाँ:
- ब्रह्मोस मिसाइल।
- मल्टी-फंक्शन सर्विलांस और थ्रेट अलर्ट (MFSTAR) रडार।
- मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM) वायु रक्षा प्रणाली।
- 76 मिमी गन और क्लोज-इन वेपन सिस्टम।
- पनडुब्बी रोधी रॉकेट और टॉरपीडो।
- प्रणोदन प्रणाली: इसमें कंबाइंड डीजल और गैस (CODOG) प्रणोदन प्रणाली लगी है।
- स्वदेशीकरण और उद्योग की भूमिका:
- इसमें लगभग 75% स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है।
- इसके निर्माण में 200 से अधिक MSMEs की भागीदारी रही है।
- कार्यक्षमता में वृद्धि: निर्माण समय को घटाकर 80 महीने कर दिया गया (शुरुआती जहाजों के लिए यह 93 महीने था)।
- महत्व
- यह भारत की समुद्री युद्ध क्षमता को मजबूत करता है।
- स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देता है।
- अगली पीढ़ी के युद्धपोतों के साथ नौसेना की युद्ध तैयारी को बेहतर बनाता है।
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