पनडुब्बी-रोधी युद्धपोत ‘मालवान’ भारतीय नौसेना को सौंपा गया

  • 01 Apr 2026

31 मार्च, 2026 को, भारतीय नौसेना ने कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित दूसरे एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) ‘मालवान’ (Malwan) को अपने बेड़े में शामिल किया।

मुख्य बिंदु

  • स्वदेशी विकास:
    • नौसेना के विनिर्देशों के अनुसार भारत में ही इसका डिज़ाइन और निर्माण किया गया है।
    • यह DNV वर्गीकरण मानकों का अनुपालन करता है [DNV (Det Norske Veritas) नॉर्वे स्थित एक अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण सोसायटी है]।
  • नामकरण का महत्व:
    • इसका नाम एक ऐतिहासिक तटीय शहर ‘मालवान’ के नाम पर रखा गया है।
    • यह छत्रपति शिवाजी महाराज की गौरवशाली समुद्री विरासत से जुड़ा हुआ है।
    • यह पहले के आईएनएस ‘मालवान’ (जिसे 2003 में सेवामुक्त कर दिया गया था) की विरासत को आगे बढ़ाता है।
  • तकनीकी विशिष्टताएँ:
    • लंबाई: 80 मीटर।
    • विस्थापन (Displacement): 1,100 टन से अधिक।
    • यह वाटरजेट प्रणोदन (waterjet propulsion) प्रणाली से लैस है।
  • परिचालन क्षमताएँ:
    • तटीय जल क्षेत्र में पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-submarine warfare)।
    • पानी के भीतर निगरानी (Underwater surveillance)।
    • कम तीव्रता वाले समुद्री संचालन।
    • समुद्री सुरंग युद्ध (Mine warfare) क्षमता।
  • उन्नत प्रणालियाँ:
    • टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेट से लैस।
    • आधुनिक रडार और सोनार प्रणालियाँ।
  • महत्व:
    • यह भारत की तटीय रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूत करता है।
    • 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत स्वदेशी जहाज निर्माण को बढ़ावा देता है।
    • पानी के भीतर मौजूद खतरों का मुकाबला करने के लिए नौसेना की क्षमता को बढ़ाता है।