भारत के PFBR ने हासिल की अपनी पहली क्रिटिकैलिटी
- 08 Apr 2026
6 अप्रैल, 2026 को, तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित भारत के 500 MWe “प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर” (PFBR) ने पहली “क्रिटिकैलिटी” (स्व-धारित नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया की स्थिति) हासिल कर ली है, जो देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
मुख्य बिंदु
- क्रिटिकैलिटी: यह वह अवस्था है, जब एक परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया अपने आप निरंतर जारी रह सकती है। हालाँकि, इसका मतलब यह नहीं है कि विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है।
- इसे ‘परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड’ (AERB) की सुरक्षा मंज़ूरी के बाद हासिल किया गया है।
- प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) [कलपक्कम]: इसकी डिज़ाइन ‘इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र’ (IGCAR) द्वारा तैयार की गई है और निर्माण ‘भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड’ (BHAVINI) द्वारा किया गया है। यह पूरी तरह से सुदृढ़ स्वदेशी तकनीक और विशेषज्ञता पर आधारित है।
- फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) क्या है?: यह रिएक्टर जितना परमाणु ईंधन खपत करता है, उससे कहीं अधिक पैदा करता है। इसमें यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग होता है, और यह न्यूट्रॉन का उपयोग करके यूरेनियम-238 को प्लूटोनियम-239 में बदल देता है।
- प्रयुक्त तकनीक: उच्च दक्षता के लिए इसमें शीतलक के रूप में तरल सोडियम का उपयोग किया जाता है। यह एक ‘बंद ईंधन चक्र’ (Closed fuel cycle) पर काम करता है जो ईंधन के पुनर्चक्रण को संभव बनाता है और भविष्य में थोरियम के उपयोग का मार्ग प्रशस्त करता है।
- भारत के परमाणु कार्यक्रम में भूमिका: यह भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण का अहम हिस्सा है, जो यूरेनियम-आधारित और थोरियम-आधारित रिएक्टरों के बीच एक सेतु का काम करता है।
- भारत की तीन-चरणीय परमाणु रणनीति:
- चरण 1: प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग करने वाले ‘प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर्स’ (PHWRs)।
- चरण 2: अधिक विखंडनीय सामग्री उत्पन्न करने वाले ‘फास्ट ब्रीडर रिएक्टर्स’ (जैसे PFBR)।
- चरण 3: यूरेनियम-233 का उपयोग करने वाले थोरियम-आधारित रिएक्टर।
- महत्व: यह ईंधन दक्षता को बढ़ाता है और यूरेनियम आयात पर हमारी निर्भरता कम करता है। इसके साथ ही, यह स्वच्छ एवं कम-कार्बन वाले ‘बेस-लोड’ ऊर्जा उत्पादन का समर्थन करता है और उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में भारत की विशेषज्ञता को मज़बूत करता है।
- वैश्विक संदर्भ: पूर्ण रूप से संचालन प्रारंभ होने पर भारत, वाणिज्यिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला दूसरा देश बन जाएगा। वर्तमान में केवल रूस के पास ही वाणिज्यिक रूप से संचालित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर हैं।
- भविष्य का रोडमैप: ग्रिड से जुड़ने से पहले इसका गहन परीक्षण किया जाएगा और इसकी विद्युत क्षमता बढ़ाई जाएगी। इसकी सफलता बड़े पैमाने पर 600 MWe ब्रीडर रिएक्टरों के विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है, जो भारत के विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
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