भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित की लचीली नैनो-गोल्ड ऊर्जा फिल्म
- 19 May 2026
मई 2026 में मोहाली स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST) के वैज्ञानिकों ने नैनो-गोल्ड (सोने के सूक्ष्म कणों) से युक्त एक अत्यंत पतली और लचीली फिल्म विकसित की है, जो तापमान में होने वाले छोटे परिवर्तनों को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर सकती है। यह प्रौद्योगिकी पहनने योग्य स्व-ऊर्जा संचालित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों एवं स्मार्ट सेंसरों के लिए उपयोगी मानी जा रही है।
मुख्य बिंदु
- अनुसंधान का उद्देश्य: इस अध्ययन का लक्ष्य तापीय ऊर्जा (Thermal Energy) को संचित करने में सक्षम हल्के, लचीले और कम ऊर्जा खपत वाले पदार्थों को विकसित करना था।
- प्रयुक्त सामग्री: वैज्ञानिकों ने पॉलीविनाइलिडीन फ्लोराइड [Polyvinylidene Fluoride (PVDF)] का उपयोग किया, जो सेंसर एवं इलेक्ट्रॉनिक प्रौद्योगिकियों में व्यापक रूप से प्रयुक्त एक लचीला पॉलिमर है।
- नैनो-गोल्ड नवाचार: 100 नैनोमीटर से भी पतली फिल्मों में सूक्ष्म षट्कोणीय स्वर्ण नैनोकणों को समाहित किया गया।
- पायरोइलेक्ट्रिक प्रभाव: यह फिल्म उन्नत पायरोइलेक्ट्रिक क्षमता के माध्यम से तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव से विद्युत संकेत उत्पन्न करती है।
- बेहतर दक्षता: स्वर्ण नैनोकणों ने प्रकाश अवशोषण तथा ऊष्मा-से-विद्युत ऊर्जा रूपांतरण दक्षता को बढ़ाया।
- तापमान सीमा: यह प्रणाली 294–301 केल्विन के परिवेशीय तापमान दायरे में प्रभावी रूप से कार्य करती है।
- संभावित उपयोग: यह प्रौद्योगिकी पहनने योग्य इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्ट फोटो-डिटेक्टर्स, स्वास्थ्य उपकरणों, पर्यावरण निगरानी प्रणालियों तथा निम्न-स्तरीय ऊष्मा ऊर्जा संग्रहण उपकरणों में उपयोगी हो सकती है।
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