विधिक माप विज्ञान नियमों में संशोधन
- 07 Jul 2026
6 जुलाई, 2026 को उपभोक्ता मामलों के विभाग ने विधिक माप विज्ञान (सामान्य) नियमावली, 2011 [Legal Metrology (General) Rules, 2011] में संशोधन कर उच्च क्षमता वाले भारमापन उपकरणों के सत्यापन की प्रक्रिया को सरल बनाया।
मुख्य बिंदु
- प्रमुख सुधार: संशोधन के तहत सफल पुनरावृत्ति परीक्षण (Repeatability Test) के बाद अनिवार्य मानक भार की आवश्यकता को उपकरण की अधिकतम क्षमता के 50 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है।
- पूर्व व्यवस्था: पहले एक टन या उससे अधिक क्षमता वाले उपकरणों के लिए स्थिर भारों के उपयोग से पूर्व कम-से-कम एक टन अथवा अधिकतम क्षमता के 50 प्रतिशत के बराबर मानक भार आवश्यक था।
- वैज्ञानिक आधार: संशोधित सत्यापन पद्धति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत पुनरावृत्ति परीक्षण प्रणाली पर आधारित है, जिससे मापन की विश्वसनीयता और सटीकता सुनिश्चित होती है।
- लाभ: इस सुधार से अनुपालन बोझ, परिवहन एवं प्रबंधन लागत तथा परिचालन अवरोधों में कमी आएगी तथा उद्योगों एवं वेब्रिज संचालकों के लिए सत्यापन प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
- उद्देश्य: यह संशोधन उपभोक्ता संरक्षण और मापन की शुद्धता से समझौता किए बिना विज्ञान-आधारित नियामकीय व्यवस्थाओं को अपनाकर ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देता है।
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