पाइपवोर्ट की दो नई प्रजातियों की खोज

  • 05 Oct 2020

( 03 October, 2020, , www.pib.gov.in )


अक्टूबर 2020 में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्त संस्थान, पुणे के अघरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (एआरआई) के वैज्ञानिकों ने पश्चिमी घाट में महाराष्ट्र और कर्नाटक में ‘पाइपवोर्ट’ (pipeworts) की दो नई प्रजातियों की खोज की है।

महत्वपूर्ण तथ्य: पादप समूह की दो नई प्रजातियों को उनके विभिन्न औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है।

  • पाइपवोर्ट -एरिओकौलोन (Eriocaulon) के नाम से प्रसिद्ध यह पादप समूह, मानसून के दौरान एक छोटी अवधि के भीतर अपने जीवन चक्र को पूरा करता है। भारत में इसकी लगभग 111 प्रजातियां पाई जाती है।
  • महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले से मिली प्रजाति का नाम इसके सूक्ष्म पुष्पक्रम आकार के कारण ‘एरिओकौलोन पर्विसेफलम (Eriocaulon parvicephalum) रखा गया और कुमता, कर्नाटक से प्राप्त दूसरी प्रजाति का नाम तटीय कर्नाटक क्षेत्र करावली के नाम पर ‘एरिओकौलोन करावालेंस’ (Eriocaulon karaavalense) रखा गया।
  • इस पादप समूह की अधिकांश प्रजातियां पश्चिमी घाट एवं पूर्वी हिमालय में पायी जाती हैं तथा इनमें से लगभग 70% देशज हैं। इनमें से एक प्रजाति, एरिओकौलोन सिनेरियम (Eriocaulon cinereum), अपने कैंसर रोधी, पीड़ानाशक, सूजनरोधी गुणों के लिए प्रसिद्ध है। खोजी गई इन नई प्रजातियों के औषधीय गुणों का पता लगाया जाना अभी बाकी है।
  • यह शोध ‘फाइटोटैक्सा’ एवं ‘एनलिस बोटनीकी फेनिकी’ (Phytotaxa and Annales Botanici Fennici) नाम की शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ।