ई-कॉमर्स के लिए उपभोक्ता संरक्षण नियमों में संशोधन
- 11 Sep 2026
10 सितंबर, 2026 को भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग ने उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 में संशोधन करते हुए उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए। इसका उद्देश्य उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करते हुए ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए पारदर्शी और संतुलित नियामक ढांचा विकसित करना है।
मुख्य बिंदु
- मूल्य पारदर्शिता: छूट घोषित करते समय प्लेटफॉर्म को घटी हुई कीमत और पूर्व कीमत, दोनों प्रदर्शित करनी होंगी।
- पूर्व कीमत: इससे आशय पिछले30 दिनों में दी गई न्यूनतम कीमत से है।
- सर्च परिणाम: ई-कॉमर्स संस्थाएं उपभोक्ताओं को गुमराह करने के लिए सर्च परिणामों में हेरफेर नहीं कर सकेंगी।
- प्रायोजित सूची: प्रायोजित उत्पाद सूचियों के संबंध में पारदर्शिता संबंधी आवश्यकताओं को सख्त किया गया है।
- डार्क पैटर्न: भ्रामक डिजिटल इंटरफेस प्रथाओं के विरुद्ध सुरक्षा उपायों को मजबूत किया गया है।
- आयातित वस्तुएँ: प्लेटफॉर्म को आयातक का विवरण और मूल देश (Country of Origin) बताना होगा।
- शिकायत निवारण: ई-कॉमर्स संस्थाओं कोराष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की कन्वर्जेंस प्रक्रिया से जुड़ना होगा।
- शिकायत की प्रति: शिकायत अधिकारी को शिकायतकर्ता को दर्ज शिकायत की एक प्रति उपलब्ध करानी होगी।
- प्रभावी तिथि: संशोधित नियम1 जनवरी, 2027 से लागू होंगे।
- उद्देश्य: संशोधनों का लक्ष्य डिजिटल बाजारों में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाना है।
सामयिक खबरें
सामयिक खबरें
सामयिक खबरें
राष्ट्रीय
- राजनीति और प्रशासन
- अवसंरचना
- आंतरिक सुरक्षा
- आदिवासियों से संबंधित मुद्दे
- कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ
- कार्यकारी और न्यायपालिका
- कार्यक्रम और योजनाएँ
- कृषि
- गरीबी और भूख
- जैवविविधता संरक्षण
- पर्यावरण
- पर्यावरण प्रदूषण, गिरावट और जलवायु परिवर्तन
- पारदर्शिता और जवाबदेही
- बैंकिंग व वित्त
- भारत को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह
- भारतीय अर्थव्यवस्था
- रक्षा और सुरक्षा
- राजव्यवस्था और शासन
- राजव्यवस्था और शासन
- रैंकिंग, रिपोर्ट, सर्वेक्षण और सूचकांक
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी
- शिक्षा
- सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप
- सांविधिक, विनियामक और अर्ध-न्यायिक निकाय
- स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दे


