दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत संशोधन
- 16 Sep 2026
15 सितम्बर,2026 को भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने कॉर्पोरेट देनदारों के व्यक्तिगत गारंटरों (Personal Guarantors) से जुड़ी दिवाला समाधान कार्यवाही में लेनदारों के सुरक्षा उपायों को मजबूत करने हेतु चार प्रमुख संशोधन प्रस्तावित किए हैं।
प्रमुख संशोधन और उनके प्रावधान
- संबंधित पक्षों के मतदान पर प्रतिबंध: व्यक्तिगत गारंटर के संबंधित पक्षों के रूप में अर्हता प्राप्त करने वाले लेनदारों को पुनर्भुगतान योजना पर मतदान करने से बाहर रखा जाएगा, जिससे हितों के टकराव को रोका जा सके।
- परिहार लेन-देन की कड़ी जाँच: समाधान पेशेवरों (Resolution Professional) के लिए यह जांच करना अनिवार्य होगा कि गारंटर प्रासंगिक अवधि के दौरान पक्षपातपूर्ण, कम मूल्य वाले या जबरन ऋण लेन-देन में शामिल था या नहीं। इसके निष्कर्ष मतदान से पहले लेनदारों के समक्ष रखे जाएंगे।
- संपत्तियों का स्वतंत्र मूल्यांकन: गारंटर की संपत्तियों के उचित और वसूली योग्य मूल्य का निर्धारण करने के लिए एक पंजीकृत मूल्यांकक नियुक्त किया जाएगा, जिसकी रिपोर्ट लेनदारों को सौंपी जाएगी।
- निर्णयों के कारणों को दर्ज करना: समाधान पेशेवरों को अब केवल मतदान परिणाम ही नहीं, बल्कि लेनदारों के निर्णयों के पीछे की गई चर्चाओं और कारणों को भी रिकॉर्ड करना होगा।
इन संशोधनों से दिवाला प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और लेनदारों के लिए सुरक्षित बनेगी।
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