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वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर खोजे मंगल जैसे तीन स्थल
- 17 Oct 2026
16 अक्टूबर 2026 को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने भारतीय वैज्ञानिकों के शोध की जानकारी दी, जिसमें तमिलनाडु और चिली के तीन स्थलों पर मंगल जैसे खनिज मिले।
मुख्य तथ्य
- शोधकर्ता: केरल विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु और चिली के क्षेत्रों में मंगल ग्रह से मिलती-जुलती भूवैज्ञानिक परिस्थितियों का अध्ययन किया।
- प्रमुख स्थल: तमिलनाडु के नेवेली और तिरुचिरापल्ली की बंजर भूमि तथा चिली के अटाकामा रेगिस्तान को मंगल के अनुरूप स्थल (Mars Analog Sites) माना गया।
- दो प्रमुख खनिज: नेवेली में मेलान्टेराइट (Melanterite), जबकि तिरुचिरापल्ली और अटाकामा रेगिस्तान में जिप्सम (Gypsum) की पहचान हुई। दोनों जलयुक्त सल्फेट खनिज हैं।
- मेलान्टेराइट का महत्त्व: यह खनिज नमी, अम्लीय वातावरण और ऑक्सीकरण (Oxidation) का संकेत देता है। इससे मंगल पर सल्फेट खनिज बनने की प्रक्रिया समझने में मदद मिलेगी।
- जिप्सम का महत्त्व: यह खनिज अतीत में पानी की मौजूदगी का प्रमाण सुरक्षित रख सकता है। इसमें संभावित जैविक संकेत (Biosignatures) भी संरक्षित रह सकते हैं।
- प्रयुक्त तकनीक: लेजर रमन स्पेक्ट्रोमीटर से खनिजों की पहचान की गई। यह उपकरण प्रकाश की सहायता से पदार्थों की रासायनिक संरचना पहचानता है।
- वित्तीय सहयोग: अनुसंधान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की FIST योजना से समर्थित वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग किया गया।
- शोध प्रकाशन: निष्कर्ष जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: प्लैनेट्स में दो शोधपत्रों के रूप में प्रकाशित हुए।
- महत्त्व: ये स्थल मंगल पर पानी के इतिहास और जीवन के अनुकूल रही संभावित परिस्थितियों को समझने तथा भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की योजना बनाने में सहायक होंगे।


